उत्तराखंड स्थापना के 25 वर्ष: स्वास्थ्य क्रांति की ओर बढ़ते कदम, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में बड़ी उपलब्धियां

देहरादून, 7 नवम्बर: उत्तराखंड राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने पर स्वास्थ्य क्षेत्र में राज्य ने अभूतपूर्व प्रगति की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में उत्तराखंड ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और मेडिकल शिक्षा में सुधार जैसे कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।

वर्तमान में राज्य में 13 जिला चिकित्सालय, 21 उपजिला चिकित्सालय, 80 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 577 पीएचसी और लगभग 2000 मातृ-शिशु कल्याण केंद्र सक्रिय रूप से स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार

राज्य सरकार ने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और मातृ व शिशु मृत्यु दर घटाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। हाल ही में 6 उपजिला चिकित्सालय, 6 सीएचसी और 9 पीएचसी के उन्नयन को मंजूरी दी गई है। देहरादून के सेलाकुई और नैनीताल के गेठिया में 100-100 शैय्यायुक्त मानसिक चिकित्सालयों का निर्माण तेजी से चल रहा है। केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तरकाशी, गोपेश्वर, बागेश्वर और रुड़की में 200 शैय्यायुक्त क्रीटिकल केयर ब्लॉक, जबकि मोतीनगर (हल्द्वानी) और नैनीताल में 50-50 शैय्यायुक्त ब्लॉक तैयार किए जा रहे हैं।
राज्य में देश की पहली हेली-एम्बुलेंस सेवा एम्स ऋषिकेश के सहयोग से शुरू की गई है।

मातृ और शिशु मृत्यु दर में भारी गिरावट

राज्य निर्माण के समय शिशु मृत्यु दर 52 प्रति हजार थी, जो अब घटकर 20 रह गई है। मातृ मृत्यु दर  450 प्रति लाख से घटकर 91 हो गई है। सकल प्रजनन दर  3.3 से घटकर 1.7 पर आ गई है। राज्य में प्रतिरक्षण दर अब 88.6% तक पहुँच चुकी है, जबकि राज्य गठन के समय यह केवल 47% थी। संस्थागत प्रसव दर अब 83.2% हो गई है, जो पहले मात्र 21% थी।

चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या में बढ़ोतरी

राज्य गठन के समय 1621 डॉक्टरों के पद स्वीकृत थे, जो अब बढ़कर 2885 हो गए हैं। इनमें से 2598 डॉक्टर वर्तमान में कार्यरत हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी गई है। राज्य सरकार ने 1399 नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति की है और एएनएम पदों की संख्या बढ़ाकर 2295 की है।

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से स्वास्थ्य में क्रांति

राज्य में अब तक 1985 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) स्थापित किए जा चुके हैं। इनसे हर साल 34 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो रहे हैं। बीते तीन वर्षों में 28.8 लाख लोगों की हाई ब्लड प्रेशर व डायबिटीज जांच, 28.4 लाख मुख कैंसर और 13.1 लाख महिलाओं के स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग की गई है।

108 आपातकालीन सेवा बनी जीवनरक्षक

वर्ष 2008 में शुरू हुई 108 एम्बुलेंस सेवा अब राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है। वर्तमान में राज्य में 272 एम्बुलेंस हैं  जिनमें 217 बेसिक, 54 एडवांस लाइफ सपोर्ट और 1 बोट एम्बुलेंस शामिल है। 2019 से अगस्त 2025 तक इस सेवा के माध्यम से 8.79 लाख से अधिक लोगों को आपातकालीन सहायता मिली है।

जन औषधि केंद्रों से सस्ती दवाएं

राज्य में 335 प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र संचालित हैं, जहां से नागरिकों को 50-80% तक सस्ती दवाएं उपलब्ध हो रही हैं। 48 नए केंद्र भी प्रस्तावित हैं।

टीबी मुक्त उत्तराखंड अभियान

अब तक 2182 पंचायतें टीबी मुक्त घोषित की जा चुकी हैं। 18,159 निक्षय मित्र इस अभियान से जुड़े हैं, जिनमें से 8658 सक्रिय रूप से टीबी मरीजों की मदद कर रहे हैं।

रक्त बैंक और डायलिसिस सेवाओं का विस्तार

2016 से अब तक राज्य में 65 रक्त बैंक (28 सरकारी, 18 निजी और 19 चैरिटेबल) स्थापित किए गए हैं। राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम के तहत 19 केंद्रों में 166 मशीनों से इस वर्ष 46,958 डायलिसिस सत्र पूरे किए जा चुके हैं।