फरीदकोट में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान संधवां ने केंद्र सरकार की व्यापार नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि न्यूज़ीलैंड (NZ) से संबंधित आयात शुल्क में की गई कटौती को ‘स्वदेशी’ नीति कहना पूरी तरह गलत है। संधवां ने इसे देश के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा कि ऐसी नीतियां कहीं न कहीं ईस्ट इंडिया कंपनी जैसी सोच को दर्शाती हैं, जिसमें विदेशी हितों को प्राथमिकता दी जाती थी।
संधवां ने कहा कि स्वदेशी का वास्तविक अर्थ देश के किसानों, छोटे व्यापारियों और स्थानीय उद्योगों को मजबूत करना होता है। लेकिन जब सरकार विदेशी देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर शुल्क घटाती है, तो इसका सीधा नुकसान देशी उत्पादकों को उठाना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे भारतीय किसान और उद्योग प्रतिस्पर्धा में कमजोर पड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में विदेशी उत्पादों को सस्ता बनाना किसानों के साथ अन्याय है। इससे न केवल किसानों की आय प्रभावित होती है, बल्कि स्थानीय उद्योगों में रोजगार के अवसर भी कम होते हैं। संधवां ने चेतावनी दी कि यदि ऐसी नीतियां जारी रहीं, तो देशी उत्पादन धीरे-धीरे खत्म हो सकता है।
कार्यक्रम के दौरान संधवां ने सरकार से मांग की कि वह व्यापार नीतियों की पुनः समीक्षा करे और ऐसे फैसले लेने से पहले किसानों, व्यापारियों और उद्योग जगत से व्यापक संवाद करे। उन्होंने कहा कि सरकार को स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए ठोस योजनाएं बनानी चाहिए, ताकि आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार हो सके।
संधवां ने यह भी कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब विदेशी ताकतों को आर्थिक रूप से बढ़ावा दिया गया, तब-तब देश को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसी नीतियों के प्रति जागरूक रहें और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं।
इस मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, किसान और व्यापारी मौजूद रहे। सभी ने संधवां की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को स्वदेशी हितों की रक्षा के लिए गंभीर कदम उठाने चाहिए।