पंजाब कैबिनेट मंत्री का अकाल तख्त साहिब दौरा
पंजाब के कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंध आज अकाल तख्त साहिब में पेश हुए. उन्होंने नंगे पांव सतनाम वाहेगुरु का जाप किया और हेरिटेज स्ट्रीट से चलते हुए अकाल तख्त पहुँचे. वहां उन्होंने श्रद्धा-भरे वातावरण में समाज के साथ मुलाकात की और शुरुआती सत्कार स्वीकार किया. तस्वीर विवाद के बारे में पाँच सिंह साहिबाओं के सामने उन्होंने स्पष्ट स्पष्टीकरण दिया. उनके शब्दों में अकाल तख्त साहिब का आदेश मुख्यमंत्री के प्रति सम्मानजनक माना गया. यह कदम विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण संकेत है. साथ ही श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के अनुसार विभागीय सुधार पर बल दिया गया. इस घटनाक्रम से पंजाब की सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा का संदेश भी मजबूत हुआ.
आदेश और अधिकारी चयन
सौंध ने कहा कि अकाल तख्त साहिब का आदेश उनके लिए मान्य है. जत्थेदार ने कहा, विभाग में ऐसे अधिकारी होने चाहिए जो सिख सिद्धांत और पंजाब की विरासत से परिचित हों. भविष्य में तस्वीरों के मामले में लापरवाही नहीं होगी. एक समझदार और विवेकशील अधिकारी नियुक्त किया जाएगा. अकाल तख्त की नीति के अनुरूप चयन प्रक्रिया पारदर्शी और स्वच्छ होगी. मंत्री ने कहा कि मर्यादा और भावनाओं का सम्मान अनिवार्य है. यह कदम प्रशासन की जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में है. साथ ही, विभागीय तैनाती में स्पष्ट मानदंड लागू होंगे. अधिक जानकारी के लिए SGPC साइट देखें SGPC.
तस्वीर विवाद की पृष्ठभूमि
दरअसल, अकाल तख्त साहिब ने सौंध और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के पदाधिकारियों को बुलाया था. तीनों से आनंदपुर साहिब में भाई जीवन सिंह की यादगार के चित्रों पर स्पष्टीकरण मांगा गया. तस्वीरें सिख सिद्धांतों, मर्यादा और भावनाओं के विरुद्ध होने के आरोपों के साथ जाँच में आईं. स्पष्टीकरण के बाद आगे की कार्रवाई स्पष्ट हो गई. यह मामला समुदायों के बीच समन्वयन और संवाद की मांग करता है. गौण मुद्दे छोड़कर मुख्य बिंदु परounज फोकस बनाए रखने की बात दोहराई गई. अकाल तख्त ने स्पष्ट किया कि भावनात्मक संतुलन बनाए रखना आवश्यक है. इस बदले हुए ढांचे में नई गाइडलाइंस भी आजमाई जाएंगी.
भाई जीवन सिंह की यादगार से जुड़ा मामला
दरअसल, आनंदपुर साहिब की यादगार में लगे फोटो विवाद को लेकर स्पष्टीकरण माँगा गया. भाई जीवन सिंह की याद में लगाई गई तस्वीरों पर सामाजिक-धार्मिक मानदंडों के उल्लंघन के आरोप उभर कर सामने आए. इन आरोपों के पीछे सिद्धांतों और मर्यादा के प्रश्न खड़े हुए. स्पष्टीकरण के बाद समझौते की दिशा और आगे की कार्रवाई निर्धारित की गई. इस मुद्दे पर समुदाय की विभिन्न धारणाओं को एक साथ लाने की कोशिश की गई. बहस की दिशा अब संतुलन और सम्मान के आधार पर तय हो रही है. संयम और संवेदनशीलता का दायरा बढ़ाने के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत तय किए जा रहे हैं. इससे यह सुनिश्चित होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएँ.
आगे की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया
सरकार ने घटना को समयबद्ध तरीके से सुलझाने का वादा किया है. तस्वीरों की गुणवत्ता और चयन प्रक्रिया पर निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए गए. विवादित चित्रण से बचाने के लिए नई नीति और मानक बनेंगे. पंजाब की सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा इस प्रक्रिया का केंद्रीय फोकस रहेगा. दलों के नेताओं ने भी एकजुटता की आवश्यकता पर बल दिया है. संवेदनशील मुद्दों पर संवाद और सहमति बनाकर ही आगे बढ़ने की बात कही गई. इस दिशा में अधिकारियों और गणमान्यों को सहयोग जारी रखने को कहा गया. पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग पोस्ट देखें. अधिक जानकारी के लिए देखें SGPC साइट.
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