कानपुर, 05 जनवरी । शहर को कचरा मुक्त बनाने और डंपिंग यार्डों के वैज्ञानिक निस्तारण को लेकर नगर आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाया है। हाल ही में आयोजित समीक्षा बैठक में नगर आयुक्त ने स्पष्ट कर दिया कि बायोरेमेडिएशन (Bioremediation) के कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को चेतावनी दी है कि यदि काम की गुणवत्ता और गति में सुधार नहीं हुआ, तो भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ अनुबंध भी निरस्त किया जा सकता है।
निरीक्षण के दौरान मिलीं खामियां
नगर आयुक्त ने पिछले दिनों शहर के मुख्य कचरा निस्तारण केंद्रों का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि मशीनें अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रही हैं और कचरे के निस्तारण की रफ्तार तय मानकों से काफी पीछे है। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि बायोरेमेडिएशन केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखना चाहिए।
क्या है बायोरेमेडिएशन और क्यों है जरूरी?
सरल शब्दों में कहें तो, बायोरेमेडिएशन एक ऐसी तकनीक है जिसमें सूक्ष्म जीवों (Bacteria or Fungi) का उपयोग करके कचरे के ढेरों और प्रदूषित मिट्टी को साफ किया जाता है। यह पर्यावरण के अनुकूल प्रक्रिया है। शहर में सालों से जमा ‘लिगेसी वेस्ट’ (पुराना कचरा) को खत्म करने के लिए यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है। यदि इसमें देरी होती है, तो भूजल प्रदूषण और हवा में दुर्गंध की समस्या बढ़ जाती है।
अधिकारियों को सख्त निर्देश
बैठक के दौरान नगर आयुक्त ने निम्नलिखित प्रमुख निर्देश जारी किए:
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दैनिक रिपोर्ट: कार्यदायी संस्था को हर दिन के निस्तारण की रिपोर्ट शाम तक कार्यालय में जमा करनी होगी।
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मशीनों की संख्या: कचरे के ढेर को देखते हुए मशीनों (Trommel machines) की संख्या तुरंत बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
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सुरक्षा मानक: कार्यस्थल पर काम कर रहे मजदूरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा जाए।
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समय सीमा: नगर आयुक्त ने एक निश्चित समय सीमा (Deadline) निर्धारित की है, जिसके भीतर डंपिंग साइट को पूरी तरह साफ करना अनिवार्य है।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
नगर आयुक्त ने अंत में कहा, “स्वच्छता सर्वेक्षण और शहर की सेहत हमारे लिए प्राथमिकता है। जो कंपनियां समय पर काम पूरा नहीं करेंगी, उन्हें काली सूची (Blacklist) में डाल दिया जाएगा। जनता के टैक्स के पैसे का सदुपयोग होना चाहिए और इसमें किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या आलस्य स्वीकार्य नहीं है।”
इस सख्ती के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में बायोरेमेडिएशन के कार्यों में तेजी आएगी।