केस की पृष्ठभूमि
चंडीगढ़ की CBI कोर्ट ने सोमवार को DIG हरचरण सिंह भुल्लर को जमानत दे दी। यह आय से अधिक संपत्ति मामले में राहत है। CBI ने 60 दिनों में चालान दाखिल न कर पाने पर यह फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि चालान समय पर नहीं आया, तो डिफॉल्ट बेल संभव है। हालांकि अदालत ने 90 दिनों की समय-सीमा की सीबीआई दलील नहीं मानी। बचाव पक्ष ने भी कई तर्क रखे, पर न्यायालय ने उनकी बातों को भी महत्त्व नहीं दिया। भुल्लर इस समय एक और मामले में जेल में हैं और उनकी पूरी रिहाई अभी संभव नहीं है। 29 अक्टूबर को आय से अधिक संपत्ति केस की एंट्री दर्ज हुई थी, जो आगे की प्रक्रिया निर्धारित कर रहा है।
कानूनी बहस और अदालत का फैसला
जमानत के लिए वरिष्ठ वकीलों एसपीएस भुल्लर, युवराज धालीवाल और समरिता ने तर्क रखे। उन्होंने कहा कि CBI 60 दिनों में चालान पेश करने में विफल रही है। इसलिए डिफॉल्ट बेल का लाभ मिलना चाहिए। सुनवाई के दौरान CBI के वकील ने 90 दिनों की समय-सीमा की दलील दी। अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया और मौजूदा कानून 60 दिन का प्रावधान मान्य बताया। बचाव पक्ष ने कहा कि गम्भीर मामलों में भी समय-सीमा लागू होती है, पर अदालत ने उस दलील को नहीं माना। इस निर्णय से भुल्लर को जमानत मिल गई, लेकिन लाभ सीमित रहा। 60 दिन की विफलता ही जमानत के प्रमुख कारण के रूप में उभरी।
जेल में स्थिति और अन्य मामलों की स्थिति
भुल्लर इस समय किसी भी स्थिति से बाहर नहीं निकलेंगे। आय से अधिक संपत्ति मामले में उनकी रिहाई फिलहाल संभव नहीं दिखती। जमानत मिलने के बाद भी उन्हें जेल से बाहर नहीं लाया गया। कारण यह है कि एक साथ जुड़े एक अन्य मामले में उनकी जमानत याचिका पहले ही सीबीआई कोर्ट द्वारा खारिज हो चुकी है। भुल्लर ने अभी तक हाईकोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाया है। इस स्थिति से उनके समर्थकों ने राहत की उम्मीद जताई है और भविष्य की कानूनी दिशा पर नजर बनाए रखी है।
घटना क्रम और तिथि-क्रम
29 अक्टूबर को आय से अधिक संपत्ति के आरोप पर केस दर्ज किया गया। उसी समय भुल्लर रिश्वत मामले में न्यायिक हिरासत में थे। आय से अधिक संपत्ति मामले में उनकी गिरफ्तारी 5 नवंबर को दिखी। 2 जनवरी को अदालत ने भुल्लर की जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। तर्क था कि कथित बिचौलिये ने 5 अगस्त 2025 को एक लाख रुपए रिश्वत मांगी थी। शिकायत 11 अक्टूबर 2025 को दर्ज कराई गई थी। इन तिथियों से केस की धारा और समय-सीमा की बहस आगे बढ़ती रही।
निष्कर्ष और आगे की राह
यह फैसला भ्रष्टाचार मामलों में जमानत और समय-सीमा पर बहस को तेज करेगा। न्यायपालिका समय सीमा की कड़ाई दिखाने की कोशिश कर रही है। भुल्लर की कानूनी राह में अभी कई पन्ने बाकी हैं, और अगला कदम हाईकोर्ट जाने का हो सकता है। साथ ही सीबीआई के लिए चालान-डायरी के सुधार आवश्यक दिखते हैं ताकि समय-सीमा के उल्लंघन पर स्पष्ट दायरा बने। अधिक जानकारी के लिए देखें: सीबीआई आधिकारिक वेबसाइट और NDTV इंडिया न्यूज़.
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