हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर नया 2% भूमि मालिया सेस: स्थिति और असर
जल सेस को केंद्र सरकार ने गैर-कानूनी कहा था और अदालत ने इसे असंवैधानिक ठहराया। अब हिमाचल प्रदेश सरकार ने नया कर लगाया है—2% भूमि मालिया सेस। यह सेस hydro power प्रोजेक्ट्स पर लागू किया गया है। इसके कारण पंजाब पर करीब 200 करोड़ रुपए सालाना अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। BBMB के अधीन तीन बड़े प्रोजेक्ट्स पर कुल 433.13 करोड़ रुपए सालाना भार आएगा। यह भार पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के खजाने पर बंट सकता है। शानन हाइड्रो प्रोजेक्ट सहित अन्य हिस्सों पर भी अलग शुल्क लगाने का प्रावधान नोटिफिकेशन में है। BBMB ने हिमाचल सरकार के नोटिफिकेशन पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की है। पंजाब ने 24 दिसंबर 2025 को BBMB को इससे जुड़ी आपत्ति लिखित में भेजी थी। 3 जनवरी को मुख्यमंत्री ने बैठक में साफ कहा कि भूमि मालिया सेस ही लागू रहेगा। हिमाचल सरकार का तर्क है कि यह सेस गैर-कृषि भूमि उपयोग पर लगता है।
BBMB प्रोजेक्ट्स पर वित्तीय भार और पंजाब की भूमिका
नोटिफिकेशन के अनुसार शानन प्रोजेक्ट पर भी 2% भूमि मालिया सेस लगेगा। पंजाब पावरकॉम के Shanan प्रोजेक्ट पर 16.32 करोड़ रुपए सालाना अतिरिक्त शुल्क होगा। BBMB के तीन प्रमुख प्रोजेक्ट्स पर कुल 433.13 करोड़ रुपए सालाना भार बढ़ेगा। BBMB ने इस निर्णय पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की है और उसे अदालत के समक्ष चुनौती दी जा सकती है। इस कदम से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के वित्तीय मॉडल बदले जाएंगे और बिजली दरों पर असर दिख सकता है। हिमाचल सरकार के इस प्रस्ताव से BBMB के भीतर सहमति बनाम विरोध की स्थिति बन गई है। यह मामले परियोजनाओं की फंडिंग और वितरण तंत्र पर दीर्घकालीन प्रभाव छोड़ेंगे।
केंद्रीय प्रतिक्रिया और संवैधानिक दायरे में भविष्य
पूर्व में जल सेस को केंद्र ने असंवैधानिक कहा था और हाईकोर्ट ने इसे रद्द कर दिया। अब भूमि मालिया सेस का मसौदा नया संवैधानिक प्रश्न उठाता है। कई राज्यों और BBMB के प्रतिनिधि संवैधानिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। केंद्रीय कानून और गाइडलाइन की सीमा स्पष्ट करनी जरूरी है ताकि वितरण न्यायसंगत रहे। यह मामला ऊर्जा क्षेत्र के वित्त पोषण और राजस्व साझा के मॉडल पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। संभावित सुनवाई के संकेत मिल रहे हैं और केंद्र-राज्य के बीच ऊर्जा नीति पर बहस तेज हो सकती है।
आगे के कदम: कानूनी रास्ते और पाठक के लिए संदर्भ
आने वाले दिन इस मामले की कानूनी प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं और अदालत तक जा सकते हैं। राज्य सरकारें संवैधानिक विकल्पों पर विचार कर रही हैं ताकि नुकसान का विभाजन स्पष्ट रहे। केंद्र की भूमिका और अदालतों के निर्णय ऊर्जा सुरक्षा और कर संरचना पर असर डालेंगे। Hydro power क्षेत्र के वित्त पोषण पर यह सेस बड़ा प्रभाव डाल सकता है और बिजली कीमतों पर दबाव बना सकता है। अधिक जानकारी के लिए देखें: गजट नोटिफिकेशन और BBMB आधिकारिक वेबसाइट.
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