अमृतसर, 15 जनवरी । पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान गुरुवार को अमृतसर स्थित श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में पेश हुए। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज द्वारा तलब किए जाने पर मुख्यमंत्री एक साधारण और विनम्र सिख के रूप में नंगे पैर अकाल तख्त पहुंचे। वह पंजाब के चौथे ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने सिखों की इस सर्वोच्च धार्मिक पीठ के सामने अपनी हाजिरी दी है।
क्या था पूरा मामला?
अकाल तख्त के जत्थेदार ने 5 जनवरी को मुख्यमंत्री मान को सम्मन जारी किया था। उन पर आरोप थे कि सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में वह सिख गुरुओं की तस्वीरों के साथ ‘आपत्तिजनक गतिविधियां’ करते दिख रहे हैं। उन्होंने गुरुद्वारों की ‘गोलक’ (दान पेटी) और ‘दसवंध’ (कमाई का दसवां हिस्सा दान करना) की परंपरा पर विवादित टिप्पणियां की थीं।
CM मान का स्पष्टीकरण: “वीडियो फर्जी और AI जनित है”
सचिवालय में करीब एक घंटे चली बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अपना लिखित स्पष्टीकरण सौंपा। बाहर आकर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा सोशल मीडिया पर जो वीडियो प्रसारित किया जा रहा है, वह पूरी तरह से नकली, डॉक्टर्ड और AI द्वारा तैयार किया गया है। यह मेरे विरोधियों की मुझे बदनाम करने की एक गहरी साजिश है।
मान ने कहा कि वह इस वीडियो की किसी भी फॉरेंसिक लैब से जांच कराने को तैयार हैं। उन्होंने जत्थेदार को 25,000 से अधिक शिकायत पत्र भी सौंपे, जो विभिन्न धार्मिक मुद्दों से संबंधित थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनके मन में अकाल तख्त के प्रति अटूट सम्मान है और जत्थेदार साहब जो भी फैसला लेंगे, उन्हें ‘सिर-माथे’ स्वीकार होगा।
जत्थेदार का रुख
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान दर्ज कर लिया गया है। अब अकाल तख्त स्वतंत्र रूप से वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराएगा। यदि वीडियो सही पाया गया, तो मर्यादा के अनुसार धार्मिक सजा (तनखाह) सुनाई जा सकती है। फिलहाल, मुख्यमंत्री को कोई सजा नहीं दी गई है।