शिमला, 17 मार्च । हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों और सरकारी खर्च को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया है कि राज्य में 40 से ज्यादा राजनीतिक नियुक्तियां की गई हैं और हाल ही में घोषित 20 प्रतिशत वेतन कटौती महज दिखावा है।
संदीपनी भारद्वाज ने मंगलवार को कहा कि एक ओर प्रदेश की जनता महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार बोर्डों, कॉरपोरेशनों, आयोगों और सलाहकार पदों पर अपने नेताओं और समर्थकों को नियुक्त कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले इन पदों पर मिलने वाले मानदेय में भारी बढ़ोतरी की। उनके अनुसार, पहले चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन को करीब 30 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते थे, जिसे बढ़ाकर 80 हजार रुपये कर दिया गया। इसके अलावा आवास, आतिथ्य और अन्य भत्तों को जोड़ने पर कुल मासिक खर्च एक लाख रुपये से अधिक हो गया।
भाजपा का दावा है कि मार्च 2026 तक करीब 40 चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन विभिन्न बोर्डों और कॉरपोरेशनों में नियुक्त किए जा चुके हैं। भारद्वाज ने कहा कि जब इस मुद्दे पर सवाल उठने लगे तो सरकार ने 20 प्रतिशत वेतन कटौती की घोषणा की, जो लोगों की नजर में सिर्फ एक प्रतीकात्मक कदम है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने मीडिया सलाहकार, आईटी सलाहकार, राजनीतिक सलाहकार और ओएसडी जैसे कई पदों पर भी नियुक्तियां की हैं। साथ ही, कुछ पदों को कैबिनेट रैंक देने का भी आरोप लगाया गया है।
भाजपा प्रवक्ता ने राज्य के विभिन्न संस्थानों जैसे सहकारी बैंक, पर्यटन बोर्ड, उद्योग विकास निगम, अनुसूचित जाति आयोग, महिला आयोग और कौशल विकास निगम में भी राजनीतिक नियुक्तियों का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि इन पदों पर कांग्रेस से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी गई है।
मुख्य संसदीय सचिव (सीपीएस) के पदों को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। भारद्वाज ने कहा कि इन पदों की संवैधानिक स्थिति को लेकर पहले से ही बहस होती रही है, इसके बावजूद सरकार ने छह विधायकों को इस पद पर नियुक्त कर उन्हें सुविधाएं दी हैं।