जयपुर, 17 मार्च । राजस्थान हाईकोर्ट ने लैब टेक्नीशियन भर्ती-2023 में अदालती आदेश के बावजूद अभ्यर्थी को बोनस अंक नहीं देने पर नाराजगी जताई है। इसके साथ ही अदालत ने 8 अप्रैल को स्वास्थ्य निदेशक को पेश होकर अपना स्पष्टीकरण देने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि तब तक यदि अदालती आदेश की पालना कर ली जाती है तो निदेशक को हाजिर होने की जरूरत नहीं है। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश संतोष चौहान की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
अवमानना याचिका में अधिवक्ता स्वप्निल सिंह पटेल ने अदालत को बताया की भर्ती में याचिकाकर्ता को बोनस अंक का लाभ नहीं देने पर उसने हाईकोर्ट की एकलपीठ में याचिका दायर की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने 12 दिसंबर, 2024 को राज्य सरकार को आदेश जारी कर याचिकाकर्ता को बोनस अंक देने के आदेश दिए थे। इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट की खंडपीठ में अपील दायर की गई। जिसे खंडपीठ ने खारिज करते हुए एकलपीठ के आदेश को सही माना। वहीं खंडपीठ के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी करने के संबंध में निर्णय लेने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बावजूद भी राज्य सरकार की ओर से अदालती आदेश की पालना नहीं की जा रही है। ऐसे में अदालती आदेश की अवमानना करने वाले अफसरों को दंडित करते हुए आदेश की पालना सुनिश्चित कराई जाए। वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह ने आदेश की पालना के लिए पन्द्रह दिन का समय मांगा। इस पर अदालत ने आदेश की पालना के लिए समय देते हुए कहा है कि यदि इस अवधि में आदेश की पालना नहीं की गई तो स्वास्थ्य निदेशक अदालत में हाजिर होकर अपना स्पष्टीकरण पेश करें।