स्टेनोग्राफर भर्ती-2024 की मेरिट लिस्ट रद्द, पांच फीसदी की अतिरिक्त छूट को माना गलत

जयपुर, 19 मार्च । राजस्थान उच्‍च न्‍यायालय ने स्टेनोग्राफर भर्ती-2024 में पर्याप्त अभ्यर्थी उपलब्ध होने के बावजूद परीक्षा में की गई गलतियों में पांच फीसदी की अतिरिक्त छूट देने को गलत माना है। इसके साथ ही अदालत ने मामले में कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से गत 25 सितंबर को जारी प्रोविजनल मेरिट लिस्ट और 21 अक्टूबर को जारी अंतिम मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया है। अदालत ने चयन बोर्ड को आदेश दिए हैं कि गलतियों में नियमानुसार सामान्य अभ्यर्थी को बीस और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी को 25 फीसदी की छूट देते हुए 45 दिन में नई मेरिट लिस्ट जारी करे। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पांच फीसदी की अतिरिक्त छूट उसी स्थिति में दी जा सकती है, जब संबंधित श्रेणी में बिना छूट के पर्याप्त अभ्यर्थी उपलब्ध ना हो। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश दिनेश शर्मा व अन्य की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए दिए।

अदालत ने अपने आदेश में माना कि भर्ती नियम और विज्ञापन की शर्तें बाध्यकारी होती हैं और चयन प्रक्रिया के बीच इनमें बदलाव नहीं किया जा सकता। अदालत ने गत 5 नवंबर को नियुक्तियां देने पर रोक लगा दी थी।

याचिका में अधिवक्ता संदीप पाठक ने अदालत को बताया कि कर्मचारी चयन बोर्ड ने 26 फरवरी, 2024 को स्टेनोग्राफर के 444 पदों के लिए भर्ती निकाली। जिसमें प्रावधान किया गया कि परीक्षा में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों की बीस फीसदी गलतियों और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्भियों की 25 फीसदी गलतियों को स्वीकार किया जाएगा। वहीं यदि पर्याप्त संख्या में अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होंगे तो पांच फीसदी की अलग से छूट दी जाएगी। याचिका में कहा गया कि कर्मचारी चयन बोर्ड ने गत 21 अक्टूबर को चयन सूची जारी की। पर्याप्त संख्या में अभ्यर्थी होने के बावजूद भी बोर्ड ने पांच फीसदी की छूट देते हुए अपात्रों को चयन सूची में शामिल कर लिया। इसके अलावा आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को पहले की पांच फीसदी की छूट दी गई थी। ऐसे में उन्हें दोगुना लाभ मिल गया। वहीं चयन बोर्ड अब इस चयन सूची के आधार पर नियुक्तियां दे रहा है। ऐसे में अपात्रों को चयन प्रक्रिया से बाहर किया जाए। जिसका विरोध करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह ने कहा कि सेवा नियम और विज्ञापन की शर्त चयन बोर्ड को यह विवेकाधिकार देते है कि वह पांच फीसदी की छूट दे सकता है। इसके अलावा पर्याप्त संख्या को कहीं परिभाषित नहीं किया गया है। ऐसे में पर्याप्त संख्या का आकलन बोर्ड अपने स्तर पर कर सकता है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद एकलपीठ ने मेरिट लिस्ट को रद्द करते हुए पुरानी छूट के आधार पर 45 दिन में नए सिरे से मेरिट लिस्ट जारी करने को कहा है।