पंजाब: मोगा डीसी ऑफिस में खालिस्तानी झंडा मामले में दो दोषियों को 5.5 साल की सजा
पंजाब की मोहाली स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। पांच साल पहले मोगा के डीसी ऑफिस में खालिस्तानी झंडा फहराने के मामले में दो आरोपियों को दोषी करार दिया गया। अदालत ने दोनों को 5 साल 6 महीने की सजा सुनाई है। साथ ही 16-16 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। दोषियों में मोगा निवासी इंद्रजीत सिंह और जसपाल सिंह शामिल हैं। इन्हें आईपीसी, यूए(पी) एक्ट और राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया गया।
स्वतंत्रता दिवस से पहले हुई थी घटना
जांच के मुताबिक, दोनों आरोपियों ने स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले मोगा के डिप्टी कमिश्नर (DC) कार्यालय की इमारत पर खालिस्तानी झंडा फहराया था। आरोपियों ने भारतीय तिरंगे की रस्सी काटकर उसे नीचे गिरा दिया। बाद में उन्होंने तिरंगे को जमीन पर घसीटा भी। यह घटना राष्ट्रीय सम्मान के खिलाफ गंभीर अपराध मानी गई। NIA जांच ने साबित किया कि यह कार्रवाई पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थी।
पन्नू के कहने पर रची गई थी साजिश
NIA के अनुसार, यह पूरी साजिश सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के जनरल काउंसिल और घोषित आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के कहने पर रची गई थी। जांच में सामने आया कि SFJ से नकद इनाम के बदले यह काम कराया गया था। मामले में हरप्रीत सिंह नाम के SFJ सदस्य की भूमिका भी सामने आई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, उसने इंद्रजीत और जसपाल को इस काम के लिए पैसे दिए थे। यह साजिश SFJ संगठन के निर्देश पर अंजाम दी गई।
2500 डॉलर नाम देने की घोषणा
NIA ने बताया कि गुरपतवंत सिंह पन्नू ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पंजाब और हरियाणा के युवाओं को खालिस्तानी झंडे फहराने के लिए उकसाया था। उसने सरकारी दफ्तरों पर ऐसा झंडा लगाने वालों के लिए 2500 अमेरिकी डॉलर के इनाम की घोषणा भी की थी। अदालत ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों को सजा सुनाई है। यह फैसला दूसरों के लिए भी चेतावनी है। राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता
NIA की विशेष अदालत ने इस मामले में तेजी से सुनवाई करते हुए दोषियों को सजा सुनाई। यह फैसला दिखाता है कि देश की न्याय व्यवस्था कितनी सख्त है। सरकारी संपत्ति पर हमला और राष्ट्रीय ध्वज का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले में सभी आरोपियों को कानून के अनुसार सजा मिली है। उम्मीद है कि इस फैसले से भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगेगी। देश की एकता और अखंडता को चुनौती देने वालों को सबक सिखाया गया है।
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