जयपुर, 16 मई । राजस्थान उच्च न्यायालय ने भर्ती परीक्षाओं में त्रुटिपूर्ण प्रश्नों और गलत उत्तर कुंजी को लेकर बार-बार याचिकाएं आने को गंभीरता से लिया है। इसके साथ ही अदालत ने मुख्य सचिव को कहा है कि वे कार्मिक सचिव की अध्यक्षता में वरिष्ठ आईएएस अफसरों की एक हाई लेवल कमेटी का गठन करें। यह कमेटी इस विषय पर गहन परीक्षण कर भविष्य की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुचिता सुनिश्चित करने के लिए एसओपी बनाने के साथ ही अन्य सुधारात्मक उपाय भी निर्धारित करे। अदालत ने कहा है कि कमेटी यह भी परीक्षण करेगी कि क्या ऐसे प्रश्न और उत्तर कुंजी तैयार करने वाले अधिकारियों और विशेषज्ञों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई आरंभ की जा सकती है। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती-2022 लेवल द्वितीय को लेकर दायर 45 याचिकाओं पर संयुक्त रूप से सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान में बेरोजगारी ने अत्यंत गंभीर रूप धारण कर लिया है और प्रतिस्पर्धा असाधारण स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे में एक-एक प्रश्न भी अत्यधिक महत्व रखता है और एक प्रश्न से सैकडों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। इसलिए प्रश्न पत्र तैयार करने और उत्तर कुंजी बनाने में अत्यधिक सावधानी, निष्पक्षता व सतर्कता जरूरी है। अदालत ने कहा कि भर्ती एजेंसियों को परीक्षा संचालन में लापरवाही करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन पर संवैधानिक दायित्व है कि वे सक्षम विषय विशेषज्ञों के माध्यम से प्रश्न पत्र व उत्तर कुंजी पूर्ण शुचिता से तैयार करें, ताकि किसी भी गलती की संभावना नहीं हो।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने बताया कि साल 2022 की तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती लेवल 2 के परिणाम के बाद नियुक्तियां हुई। वहीं बाद में कोर्ट के आदेश से संशोधित परिणाम जारी हुआ। इसके याचिकाकर्ताओं के अंक पूर्व में नियुक्त अभ्यर्थियों से अधिक हो गए, लेकिन नई कट ऑफ में शामिल नहीं हो सके। ऐसे में उनसे कम अंक वालों को मिली नियुक्ति के चलते उन्हें भी नियुक्ति दी जाए।