सिंह पठानमाजरा को अदालत से जमानत मिलने के बाद रविवार को बठिंडा जेल से रिहा कर दिया गया।
जेल से बाहर आते ही उनके समर्थकों में उत्साह देखने को मिला और बड़ी संख्या में
मौजूद कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया।
मीडिया से बातचीत करते हुए पठानमाजरा ने कहा कि उन्हें राजनीतिक और व्यक्तिगत कारणों से गलत तरीके से फंसाया गया था।
उन्होंने कहा कि करीब एक वर्ष जेल में रहने के बावजूद उनके खिलाफ कोई आरोप साबित
नहीं हो सका और आज सत्य की जीत हुई है। पठानमाजरा
ने कहा कि खनन से जुड़े मामले में भी उनके खिलाफ कोई गवाह सामने नहीं आया।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि पार्टी नेतृत्व को उनके बारे में कोई संदेह था, तो उनसे
सीधे बातचीत की जा सकती थी।
विधायक ने अपने विधानसभा क्षेत्र सनौर के विकास
कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा क्षेत्र की समस्याओं को उठाया,
लेकिन पर्याप्त फंड जारी न होने के कारण
कई विकास परियोजनाएं प्रभावित हुईं। उन्होंने
यह भी दावा किया कि उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता आज भी बरकरार है और कई राजनीतिक दल
उनसे संपर्क बनाए हुए हैं। उन्होंने अपनी ईमानदारी और जनाधार का हवाला देते हुए
कहा कि जनता का समर्थन उनके साथ है और आगे भी रहेगा।
हरमीत सिंह पठानमाजरा के खिलाफ पटियाला के सिविल लाइन थाना में बलात्कार,
धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी सहित विभिन्न
धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद सितंबर में हरियाणा के करनाल में
उनकी गिरफ्तारी हुई थी। पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी के दौरान फायरिंग और पथराव की
घटना भी हुई थी, जिसमें
एक पुलिसकर्मी घायल हो गया था। बाद
में पठानमाजरा ने अग्रिम जमानत की याचिका दायर की, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। दिसंबर, 2025 में उन्हें भगोड़ा
घोषित कर दिया गया था। उस दौरान उनके ऑस्ट्रेलिया में होने की भी चर्चाएं सामने आई
थीं, जिसके बाद अदालत ने
उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था।