मुक्तसर में दलित युवकों के साथ बेरहमी
पंजाब के मुक्तसर जिले के गांव झोरड़ में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां मोबाइल फोन चोरी के आरोप में भीड़ ने दो दलित युवकों को बेरहमी से पीटा। आरोप है कि लोगों ने पहले दोनों युवकों के कपड़े फाड़कर अर्धनग्न कर दिया। इसके बाद उन्हें रस्सी से बांधकर खेतों में घसीटा गया। अंत में एक पेड़ से बांधकर लाठियों से पिटाई की गई। इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश फैला दिया है।
हालांकि, पुलिस का कहना है कि दोनों युवक नशे के आदी हैं। मलोट के डीएसपी जसपाल सिंह ने बताया कि एक युवक 23 साल का और दूसरा 28 साल का है। दोनों ने शनिवार को झोरड़ गांव में एक मोबाइल फोन छीना था। इसी वजह से भीड़ ने उन्हें पकड़कर मारपीट की। पुलिस के अनुसार, एक युवक पर पहले से नशे से जुड़ा मामला भी दर्ज है।
एससी आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग के चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी ने मुक्तसर के एसएसपी से रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने 9 जून 2026 तक मामले की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। इसके अलावा, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने हमलावर ग्रामीणों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि भीड़ किस तरह दोनों युवकों को बेरहमी से पीट रही है। दोनों युवकों को घसीटने की तस्वीरें भी सामने आई हैं। इसने समाज में एक बार फिर जातिगत भेदभाव और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिवार का दर्द और आरोप
घटना के बाद पीड़ित युवकों के परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। एक युवक की मां ने कहा कि परिवार के सदस्यों ने बार-बार लोगों से बच्चों को छोड़ने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि अगर कोई गलती हुई थी, तो वे हरजाना भरने को तैयार थे। लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। परिवार का आरोप है कि युवकों को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। उन्हें अपनी गलती सुधारने का मौका भी नहीं दिया गया।
यह घटना दर्शाती है कि कानून को हाथ में लेना कितना खतरनाक हो सकता है। देश में कानून का राज है और किसी को भी न्यायिक प्रक्रिया को दरकिनार नहीं करना चाहिए। इस मामले में पुलिस और आयोग दोनों सक्रिय हैं। उम्मीद है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
हालांकि, इस घटना ने समाज को एक बड़ा सबक दिया है। भीड़ की हिंसा कभी भी सही रास्ता नहीं है। अगर कोई अपराध होता है, तो उसकी शिकायत पुलिस में करनी चाहिए। कानून अपना काम करेगा। लेकिन लोगों को अपने हाथ में कानून नहीं लेना चाहिए। इससे समाज में अराजकता फैलती है और निर्दोष लोग पीड़ित होते हैं।
पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। आयोग ने रिपोर्ट मांगकर यह साफ कर दिया है कि इस तरह के अत्याचार बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। इसके अलावा, आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि पीड़ितों को न्याय मिले और दोषियों को सजा हो। इस घटना ने एक बार फिर से जातिगत भेदभाव और सामाजिक समानता की जरूरत पर जोर दिया है।
इस मामले में अब सभी की निगाहें 9 जून की सुनवाई पर टिकी हैं। उम्मीद है कि आयोग और पुलिस मिलकर इस मामले का निष्पक्ष निपटारा करेंगे। यह घटना एक सबक है कि कानून का पालन करना और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना कितना महत्वपूर्ण है।
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