फुल्का का दावा: बरगाड़ी भोग में मान नशे में, वीडियो जारी

भाजपा नेता का सीएम मान पर गंभीर आरोप

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एचएस फुल्का ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर बड़ा आरोप लगाया है। सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि 2015 में बरगाड़ी कांड के शहीदों के भोग समारोह के दौरान भगवंत मान नशे में पहुंचे थे। फुल्का ने दावा किया कि उस समय मौजूद लोगों ने मान को घेर लिया और सवाल किए। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की उपस्थिति में ऐसा व्यवहार ठीक नहीं था। इस कारण मान को समारोह से बाहर जाने के लिए कहा गया। फुल्का ने बताया कि वह इस घटना का एक पुराना वीडियो सार्वजनिक कर रहे हैं। पंजाब सरकार के मुखिया पर यह आरोप राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन

भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का निजी जीवन उसका अपना मामला है। लेकिन धार्मिक स्थल पर मर्यादा और सम्मान जरूरी है। उन्होंने कहा कि नशे की हालत में गुरुद्वारे जाना सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह पवित्र स्थानों पर सम्मानजनक व्यवहार करे। फुल्का ने आरोप लगाया कि मान का यह व्यवहार सिख समुदाय की भावनाओं के खिलाफ है। उन्होंने इस घटना को लेकर अकाल तख्त साहिब से कार्रवाई की मांग की है। यह मामला धार्मिक मर्यादा और राजनीतिक जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

अकाल तख्त साहिब में कार्रवाई की मांग

एचएस फुल्का ने श्री अकाल तख्त साहिब से इस मामले का संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी (AAP) का नेतृत्व अकाल तख्त साहिब की महत्ता को चुनौती दे रहा है। फुल्का ने जोर देकर कहा कि इतिहास में अकाल तख्त साहिब को कमजोर करने की कोशिशें असफल रही हैं। उन्होंने कहा, “सिख संगत इस बार भी ऐसी ताकतों को नाकाम करेगी।” भाजपा नेता ने पंजाब के लोगों से अपील की कि वे धार्मिक संस्थाओं की मर्यादा की रक्षा करें। यह मुद्दा राजनीति और धार्मिक मर्यादा के बीच संतुलन की जरूरत को उजागर करता है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

यह आरोप पंजाब में राजनीतिक तनाव बढ़ा सकता है। भगवंत मान पर नशे का आरोप पहले से विवादों में घिरे मुख्यमंत्री के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है। फुल्का के पास जो वीडियो है, वह इस मामले को सबूत के साथ पेश कर सकता है। सिख समुदाय के लिए गुरुद्वारों की मर्यादा सर्वोपरि है, इसलिए यह मामला संवेदनशील है। फुल्का ने कहा कि वे चाहते हैं कि अकाल तख्त साहिब इस मामले में फैसला सुनाए। यह देखना होगा कि AAP सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है। इस पूरे प्रकरण से पंजाब की राजनीति में नया विवाद पैदा हो सकता है।
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