एम्स बिलासपुर की बड़ी उपलब्धि : ब्रिटिश जर्नल ऑफ रेडियोलॉजी में प्रकाशित हुआ पहला एमडी थीसिस

धर्मशाला, 24 जून । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर के रेडियोडायग्नोसिस विभाग ने एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की है। विभाग के शोध अध्ययन “कम्पेरेटिव डायग्नोस्टिक एक्यूरेसी ऑफ ड्यूल-एनर्जी सीटी, डिफ्यूजन-वेटेड एमआरआई एंड केमिकल शिफ्ट एमआरआई इन सर्वाइकल लिम्फ नोड मेटास्टेसिस इन हेड एंड नेक कैंसर” का प्रकाशन विश्व की प्रतिष्ठित मेडिकल इमेजिंग पत्रिकाओं में से एक ब्रिटिश जर्नल ऑफ रेडियोलॉजी में हुआ है।

यह शोध कार्य एम्स बिलासपुर के रेडियोडायग्नोसिस विभाग के जूनियर रेजिडेंट डॉ. राजेश कन्ना द्वारा किया गया, जिन का मार्गदर्शन डॉ. लोकेश राणा, एसोसिएट प्रोफेसर, रेडियोडायग्नोसिस विभाग, एम्स बिलासपुर ने किया। इस शोध के सह-मार्गदर्शक डॉ. नरवीर चौहान, डॉ. सुदेश तथा डॉ. मनुप्रिया रहे, जिनके सहयोग और विशेषज्ञता ने इस शोध को सफलतापूर्वक पूर्ण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह उपलब्धि विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एम्स बिलासपुर का पहला एमडी शोधप्रबंध है, जो किसी अंतरराष्ट्रीय समीक्षित वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। डॉ. राजेश कन्ना एम्स बिलासपुर के प्रथम स्नातकोत्तर (पीजी) बैच के छात्र रहे हैं। इस कारण यह उपलब्धि संस्थान की शैक्षणिक यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है और एम्स बिलासपुर में विकसित हो रही सशक्त शोध संस्कृति का प्रमाण भी है।

विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ लोकेश राणा ने बताया कि इस अध्ययन में सिर एवं गर्दन के कैंसर के रोगियों में गर्दन के लिम्फ नोड्स में कैंसर के प्रसार का पता लगाने के लिए उन्नत इमेजिंग तकनीकों की तुलनात्मक प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया गया है। मेटास्टेटिक लिम्फ नोड्स की सटीक पहचान रोग की स्टेजिंग, उपचार योजना और रोग के पूर्वानुमान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इस शोध के निष्कर्ष कैंसर इमेजिंग में बेहतर निदान रणनीतियों के विकास तथा रोगियों के उपचार परिणामों में सुधार में योगदान देंगे।

उधर शोधकर्ताओं ने एम्स बिलासपुर के पूर्व कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह, (सेवानिवृत्त) के मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया, जिनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता और अनुसंधान के प्रति दूरदर्शी सोच ने संस्थान में एक मजबूत शोध वातावरण विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साथ ही प्रोफेसर अनुपम प्रशेर, डीन (रिसर्च), एम्स बिलासपुर के निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन के लिए भी विशेष धन्यवाद व्यक्त किया गया, जिन्होंने संस्थान में उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

रेडियोलॉजी विभाग के संकाय सदस्यों डॉ. वरुण, डॉ. शिखा और डॉ. रेशम सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों की समर्पित मेहनत का परिणाम है तथा यह दर्शाती है कि देश के अपेक्षाकृत नए एम्स संस्थानों में शामिल होने के बावजूद एम्स बिलासपुर निरंतर अपनी शैक्षणिक और अनुसंधान क्षमताओं को सुदृढ़ कर रहा है।