कलानौर का खुलासा: 1996 में SSP संधू पर हमला, खालड़ा की मौत का बदला?

गुरदासपुर में खाड़कू लहर से जुड़े निशान सिंह का दावा

गुरदासपुर के कलानौर निवासी निशान सिंह ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1996 में अमृतसर जेल में उन्होंने एसएसपी अजीत सिंह संधू पर हमला किया था। यह हमला भाई जसवंत सिंह खालड़ा की शहादत का बदला लेने के लिए किया गया। निशान सिंह ने मीडिया से बातचीत में यह जानकारी दी। उनका कहना है कि उनका इरादा संधू को जान से मारने का था। इस हमले के बाद उन्हें जालंधर केंद्रीय जेल में स्थानांतरित कर दिया गया।

1987 की फर्जी मुठभेड़ का जिक्र

निशान सिंह ने अपने पुराने अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि 1987 में पुलिस ने एक कथित फर्जी मुठभेड़ में उन्हें गोली मार दी थी। सिर और टांग में गोली लगी थी। उस वक्त सात अन्य युवाओं को भी गोली मारी गई थी। निशान सिंह किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग निकले। यह घटना खाड़कू लहर से जुड़े संघर्ष का हिस्सा थी। इस फर्जी मुठभेड़ के बाद वह काफी समय तक फरार रहे।

निशान सिंह की गिरफ्तारी और जेल यात्रा

1988 में निशान सिंह को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें अमृतसर जेल में बंद कर दिया गया। यहीं पर उन्होंने एसएसपी अजीत सिंह संधू पर हमले की योजना बनाई। निशान सिंह ने कहा कि यह हमला भाई जसवंत सिंह खालड़ा की शहादत का प्रतिशोध था। उनके मुताबिक, इस हमले ने पंजाब में उस दौर के तनाव को उजागर किया। पंजाब का इतिहास ऐसी घटनाओं से भरा पड़ा है।

खाड़कू लहर का प्रभाव

निशान सिंह खाड़कू लहर से जुड़े रहे हैं। यह लहर पंजाब में आंदोलन का एक हिस्सा थी। उनके दावे इस बात को दर्शाते हैं कि कैसे कुछ लोग अपनी विचारधारा के लिए हिंसा का सहारा लेते थे। एसएसपी अजीत सिंह संधू पर हमला इसका एक उदाहरण है। निशान सिंह की जिंदगी ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। फर्जी मुठभेड़ से लेकर जेल तक का सफर उनके संघर्ष को बताता है।

निशान सिंह का वर्तमान जीवन

आज निशान सिंह गुरदासपुर के कलानौर में रहते हैं। वह अपने अतीत को याद करते हैं और उसका बचाव करते हैं। उनके बयान ने फिर से पंजाब के पुराने घावों को उभारा है। पुलिस और प्रशासन अब इस मामले पर गौर कर सकता है। निशान सिंह के दावे की पुष्टि या खंडन अभी नहीं हुआ है। यह घटना पंजाब के इतिहास में एक और अध्याय जोड़ती है।
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