पठानकोट-माजरा: टूटी सड़क, मानसून में 5000 लोगों का संपर्क खतरे में!

पठानकोट-माजरा मार्ग पर बारिश से क्षतिग्रस्त सड़क का अब तक कोई स्थायी हल नहीं

पठानकोट-माजरा मुख्य मार्ग पर पिछले वर्ष बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़क का अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं है। मानसून की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र के 4 से 5 गांवों की करीब 5,000 आबादी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों को एक बार फिर संपर्क टूटने का डर सता रहा है। उनका कहना है कि अगर समय पर सड़क की मरम्मत या पुल का निर्माण नहीं हुआ तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

स्थानीय निवासी पवन कुमार ने बताया कि पिछले साल भारी बारिश में सड़क पूरी तरह बह गई थी। हालात इतने खराब हो गए थे कि लोगों को पैदल चलना भी मुश्किल हो गया था। प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। स्थानीय क्रेशर संचालकों ने मिट्टी और पत्थर डालकर रास्ते को अस्थायी रूप से चलने लायक बनाया।

ग्रामीण बोले- अस्थायी रास्ता बहने का खतरा है

ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश शुरू हो चुकी है। छोटे नालों के साथ-साथ डैम से भी पानी छोड़ा जा रहा है। इससे जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। अस्थायी रूप से बनाए गए इस रास्ते के फिर से बहने की आशंका है। युवा अशरफ अली और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि बरसात में सड़क कटने पर लोगों को कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है या शाम 5 बजे तक उपलब्ध अस्थायी बेली ब्रिज का सहारा लेना पड़ता है।

इसके बाद क्षेत्र का संपर्क लगभग टूट जाता है। पठानकोट-माजरा मार्ग पर यह समस्या हर साल बारिश के दौरान उत्पन्न होती है। ग्रामीण इंद्रजीत सिंह ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से स्थायी पुल निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि पुल संभव नहीं तो सड़क को मजबूत और पक्का बनाया जाए। इससे हर वर्ष हजारों लोगों की परेशानी कम होगी।
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