से संवाद कर नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभावों की जानकारी दी।
साथ ही ग्रामीणों को सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में उपलब्ध उपचार सुविधाओं के बारे
में जागरूक किया गया तथा नशा तस्करों की गतिविधियों संबंधी सूचनाएं भी जुटाई गईं।
अभियान के दौरान जिले में चार नए नशा पीड़ितों
की पहचान की गई। इनमें से दो को नागरिक अस्पताल स्थित नशा मुक्ति केंद्र से दवा उपलब्ध
करवाई गई, वहीं 12 पीड़ितों को उनके घर जाकर पहली बार आयुर्वेदिक दवा वितरित की गई,
जबकि तीन अन्य मरीजों को दूसरी बार उपचार और दवा उपलब्ध करवाई गई। इस प्रकार एक ही
दिन में कुल 17 नशा पीड़ितों तक घर-घर पहुंचकर आयुर्वेदिक और एलोपैथिक उपचार, स्वास्थ्य
परीक्षण, ब्लड टेस्ट तथा मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग की सुविधा पहुंचाई गई।
पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन का कहना है कि नशे
से दूरी ही सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है। उन्होंने कहा कि पुलिस का उद्देश्य
केवल नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि नशे की गिरफ्त में आए प्रत्येक
व्यक्ति को नया जीवन देना भी है। पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और ग्रामीण समाज के संयुक्त
प्रयासों से ही नशामुक्त समाज का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।