पंजाब कांग्रेस में टूट: रील से जीतते तो मूसेवाला न हारता

पंजाब कांग्रेस में बढ़ी दरार, चन्नी-वड़िंग आमने-सामने

पंजाब में विधानसभा चुनाव से करीब सात महीने पहले कांग्रेस पार्टी के भीतर कलह और बढ़ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग के बीच खुली ठन गई है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के खिलाफ जुबानी हमले तेज कर दिए हैं। पार्टी की आंतरिक गुटबाजी अब सार्वजनिक हो चुकी है, जिससे कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। इस बगावत ने आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस के लिए नई चिंता खड़ी कर दी है। (पंजाब कांग्रेस विवाद, चन्नी वड़िंग संघर्ष)

चन्नी की रील पर वड़िंग का पलटवार

विवाद की शुरुआत चन्नी और उनके बेटे रिदमजीत सिंह द्वारा साझा की गई एक रील से हुई। इस रील में यह डायलॉग था कि कुछ लोग गलतफहमी में हैं कि हम जवाब नहीं देंगे। तैयारी बड़ी है और पल-पल का हिसाब लिया जाएगा। राजा वड़िंग ने इसका करारा जवाब देते हुए कहा कि रील डालने से कोई चुनाव नहीं जीतता। उन्होंने कहा कि अगर लीडर काम का नहीं है तो वह कभी नहीं जीतेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सिद्धू मूसेवाला की रील के लाखों व्यूज थे, फिर भी वह चुनाव नहीं जीत पाए। यह बयान सीधे तौर पर चन्नी की कार्यशैली पर निशाना साधता दिख रहा है। (राजा वड़िंग बयान, चन्नी की रील)

जलालपुर की पार्टी से बर्खास्तगी पर घमासान

वड़िंग ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के खिलाफ बयानबाजी करने पर पूर्व विधायक मदनलाल जलालपुर को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इस फैसले के बाद चन्नी सीधे जलालपुर के घर पहुंचे और समर्थन जताया। चन्नी ने कहा कि यह समय लोगों को जोड़ने का है और उनकी लड़ाई आपस में नहीं, बल्कि विपक्षी पार्टियों से है। उधर, वड़िंग ने चन्नी के 2022 के चुनाव हारने और उसके बाद सात-आठ महीने विदेश में रहने पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि वह चुनाव के बाद विदेश नहीं गए और मुश्किल समय में पार्टी को मजबूत किया है। इस निष्कासन से पार्टी की आंतरिक कलह और गहरी हो गई है। (मदनलाल जलालपुर निष्कासित, पंजाब कांग्रेस संकट)

समाना और संगरूर में कार्यकर्ताओं की झड़प

पटियाला के समाना में एक कार्यक्रम के दौरान चन्नी समर्थकों ने राजा वड़िंग की जमकर हूटिंग की। उन्होंने वड़िंग के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। वहीं, संगरूर के एक रिजॉर्ट में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर झड़प हुई। एक-दूसरे पर कुर्सियां चलाने की घटनाएं सामने आईं। प्रभारी भूपेश बघेल के खिलाफ भी नारे लगाए गए। आज बरनाला और मानसा में होने वाली भूपेश बघेल की बैठकों में भी हंगामे की आशंका जताई जा रही है। पार्टी के दो धड़े आमने-सामने हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति है। (पंजाब कांग्रेस झड़प, समाना हूटिंग)

सीएम फेस को लेकर संग्राम और चुनावी रणनीति पर सवाल

राजा वड़िंग को दोबारा अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से यह अंतरकलह सतह पर आई है। चन्नी खेमे का मानना है कि पंजाब में 32 फीसदी दलित आबादी के मद्देनजर मजबूत चेहरे की जरूरत है। दूसरी ओर, वड़िंग युवाओं की पार्टी में पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं। आज फतेहगढ़ साहिब के कार्यक्रम में चन्नी नहीं पहुंचे, जिससे दूरी साफ झलकी। वड़िंग ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी के 40-45 विधायक टिकट कटने के डर से पार्टी छोड़ सकते हैं। इस गुटबाजी से साफ है कि कांग्रेस आगामी चुनाव में एकजुट ताकत के रूप में उतरने में विफल दिख रही है। नेतृत्व को लेकर यह खींचतान पार्टी के लिए भारी पड़ सकती है। (पंजाब कांग्रेस सीएम फेस, 2027 चुनाव रणनीति)

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