जेल से हवारा: शांतिमय मार्च निकालें, नेता जिम्मेदारी निभाएं

जगतार हवारा का शांति का संदेश

मोहाली में 15 अगस्त को होने वाले कौमी इंसाफ मोर्चा के रोष मार्च से पहले जगतार सिंह हवारा ने जेल से अहम संदेश जारी किया है। पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी हवारा ने शांतिपूर्ण मार्च की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी नेता अपनी जिम्मेदारी निभाएं। मार्च के दौरान शांति बनाए रखें और अप्रिय स्थिति से बचें। उन्होंने सिख संगत के नाम वीडियो संदेश में यह बात कही है।

दो मिनट के वीडियो में हवारा ने सभी से संयम बरतने को कहा है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से पूरा किया जाए। कोई भी व्यक्ति ऐसी हरकत न करे, जिससे माहौल खराब हो। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब हवारा की पैरोल का मामला चर्चा में है। कौमी इंसाफ मोर्चा का यह कार्यक्रम काफी अहम माना जा रहा है।

पैरोल की लड़ाई की पूरी कहानी

जगतार सिंह हवारा फिलहाल दिल्ली की मंडोली जेल में बंद है। वह बेअंत सिंह हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। वह अपनी बीमार मां से मिलने के लिए नियमित पैरोल की मांग कर रहा है। 11 जून 2025 को उसने जेल अधीक्षक को चार सप्ताह की पैरोल की अर्जी दी थी। उसकी मां नरिंदर कौर की उम्र करीब 81-83 साल है। अर्जी पर फैसला न होने पर मामला अदालत पहुंचा।

जून 2026 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने दिल्ली जेल महानिदेशक को नोटिस जारी किया। CBI ने पैरोल का विरोध किया। 6 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षक को अर्जी होम सेक्रेटरी को भेजने का निर्देश दिया। चंडीगढ़ प्रशासन को चार सप्ताह में सिफारिश देनी थी। इसके बाद जेल अधीक्षक को दो सप्ताह में फैसला लेना था।

राजनीतिक हस्तक्षेप और नए घटनाक्रम

8 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल को पत्र लिखा। उन्होंने 10 दिन की नियमित पैरोल की सिफारिश की। CM ने हवारा की मां की खराब सेहत का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि मां 31 साल से बेटे की प्रतीक्षा में है। 12 अगस्त को CM ने राज्यपाल से मुलाकात की। उन्होंने कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी लेने का आश्वासन दिया। 13 अगस्त को राज्यपाल ने मानवीय आधार पर सिफारिश केंद्र को भेज दी।

इसी दौरान सूत्रों ने बताया कि हवारा को दो दिन की कस्टडी पैरोल का ऑफर दिया गया। सुरक्षा कर्मियों की निगरानी में मां से मिलने की पेशकश की गई। हवारा ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उसने साफ कहा कि वह केवल नियमित पैरोल चाहता है। उसके प्रतिनिधियों ने बताया कि मां की मृत्यु हो जाने पर भी वह कस्टडी पैरोल स्वीकार नहीं करेगा।

समर्थन और भविष्य की संभावनाएं

पूर्व मुख्यमंत्री के पोते रवनीत सिंह बिट्टू ने भी हवारा की पैरोल का समर्थन किया है। उन्होंने मानवीय आधार पर यह समर्थन दिया है। बिट्टू ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे इस मामले में राजनीति न करें। फिलहाल हवारा मंडोली जेल में ही है और कस्टडी पैरोल का प्रस्ताव ठुकरा चुका है। राज्यपाल की सिफारिश के बाद अब मामला केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है। यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र इस मामले में क्या फैसला लेता है। इस पूरे मामले की जानकारी आप पंजाब सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर भी देख सकते हैं।

यह मामला अब कानून, राजनीति और मानवीय पहलुओं से जुड़ गया है। हवारा की मां की उम्र और बीमारी के कारण संवेदना का पहलू भी जुड़ा है। वहीं, बेअंत सिंह हत्या जैसे संवेदनशील मामले में पैरोल का फैसला काफी अहम होगा। पंजाब की राजनीति में इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं। अब केंद्र सरकार के फैसले का इंतजार होगा। आगे की ताजा अपडेट के लिए पंजाब न्यूज़ एक्सप्रेस पर विजिट करते रहें।
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