चढ़ावा चोरी: ऋषिकेश नहीं, चंडीगढ़ में राफ्टिंग, AAP vs BJP

चंडीगढ़ नगर निगम बैठक से पहले जलभराव पर सियासत गरमाई

चंडीगढ़ नगर निगम की हाउस मीटिंग शुरू होने से पहले ही जलभराव का मुद्दा सियासी जंग में बदल गया। 18 अगस्त को हुई मूसलाधार बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इसी को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने निगम कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। खास बात यह रही कि प्रदर्शनकारी राफ्टिंग बोट लेकर पहुंचे और निगम में सत्तारूढ़ भाजपा के साथ-साथ अधिकारियों को खूब घेरा।

आप नेताओं ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अब जलभराव का मजा लेने के लिए लोगों को ऋषिकेश जाने की जरूरत नहीं है। चंडीगढ़ की सड़कों पर ही उन्हें राफ्टिंग का मौका मिल रहा है। नेताओं ने सवाल उठाया कि नगर निगम सफाई और जल निकासी व्यवस्था के दावे करता है, लेकिन हल्की बारिश में ही सड़कों पर नदी जैसी स्थिति क्यों बन जाती है। प्रदर्शन को देखते हुए निगम कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा। कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की और इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कुछ देर के लिए झड़प भी हुई। आप पार्टी ने शहर की बदहाल स्थिति के लिए निगम की मशीनरी, अधिकारियों और कर्मचारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।

227 करोड़ के एजेंडे पर बबला का सवाल

हाउस मीटिंग शुरू होते ही 227 करोड़ रुपये के एजेंडे को लेकर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के पार्षदों ने मेयर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पार्षदों ने सवाल उठाया कि आखिर यह एजेंडा सदन में इस तरह क्यों लाया गया। इस पर मेयर ने कहा कि एजेंडा सदन में आ चुका है और इसे दोबारा लाया जाएगा। इस दौरान कांग्रेस पार्षद गुरप्रीत ने सवाल किया कि सदन की मंजूरी के बिना एजेंडा वापस कैसे लिया गया। मेयर ने जवाब देते हुए कहा कि 227 करोड़ रुपये के इस एजेंडे को सभी पार्षदों ने पहले मंजूरी दी थी, उस समय किसी ने विरोध नहीं किया। अब विरोध करने का कोई औचित्य नहीं बनता है।

पूर्व मेयर हरप्रीत कौर बबला ने सवाल उठाया कि यह 227 करोड़ रुपये का एजेंडा आखिर कैसे आया। उन्होंने मांग की कि एजेंडे के पीछे अगर किसी अधिकारी या नेता की भूमिका है तो उसका नाम सामने आना चाहिए। साथ ही जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इस मामले को लेकर कांग्रेस और आप के पार्षद एकजुट होकर प्रदर्शन करते नजर आए। दोनों पार्टियों ने मिलकर नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। इससे पहले भी चंडीगढ़ में इस तरह के विवादास्पद मुद्दों पर सियासी घमासान हो चुका है।

राम मंदिर चोरी मुद्दे पर कांग्रेस-भाजपा में तीखी बहस

चंडीगढ़ नगर निगम की हाउस मीटिंग के दौरान राम मंदिर में हुई चोरी का मुद्दा भी जमकर गरमाया। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पार्षदों ने सदन में प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस और भाजपा पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कांग्रेस पार्षद गुरप्रीत ने आरोप लगाया कि राम मंदिर चोरी के इस एजेंडे को जानबूझकर छिपाया गया, जबकि इसे पहले ही एक बार खारिज किया जा चुका था। उन्होंने भाजपा के कई पूर्व मेयरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया है।

भाजपा पार्षदों ने विरोध करते हुए कहा कि कांग्रेस सदन की कार्यवाही की गरिमा को भंग कर रही है। इस पर मेयर ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस पुराने मामलों को उठाएगी तो उनकी पार्टी भी पुराने कार्यकाल का चिट्ठा खोलकर रख देगी। इस दौरान सदन में काफी देर तक हंगामा और नारेबाजी होती रही। कांग्रेस पार्षद प्रेमलता और भाजपा पार्षदों के बीच भी तीखी बहस देखने को मिली। नगर निगम की इस बैठक ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि चंडीगढ़ में विकास के मुद्दों से ज्यादा सियासत और विरोध की राजनीति हावी है। फिलहाल ये मुद्दे आगे भी सदन की कार्यवाही में बाधा डाल सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए आप [हिंदी समाचार](https://www.amarujala.com/) और [चंडीगढ़ नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट](https://mcchandigarh.gov.in/) देख सकते हैं।
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