रक्षाबंधन पर शहीद भाई को याद कर बहन ने बांधी राखी
पंजाब के गांव कपूरा में रक्षाबंधन का त्योहार इस बार देशभक्ति की अनोखी मिसाल बन गया। शहीद हवलदार अवतार सिंह की बहन दविंद्र कौर बबली ने अपने भाई के आदमकद बुत पर पहुंचकर राखी बांधी। यह दृश्य केवल भाई-बहन के प्यार का नहीं, बल्कि शहादत को नमन करने का प्रतीक बन गया। दविंद्र कौर ने विधिवत रूप से राखी बांधकर अपने भाई को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर पूरे परिवार की मौजूदगी ने इस पल को और भावुक बना दिया।
हवलदार अवतार सिंह ने वर्ष 2001 में जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी बहन दविंद्र कौर बबली अपने परिवार के साथ शहीद के बुत के पास पहुंचीं। उन्होंने पूरे सम्मान के साथ राखी बांधी और भाई की शहादत को याद किया। इस दौरान शहीद के बेटे मनप्रीत सिंह, पुत्रवधू किरणप्रीत कौर, पोता अवनिंदर सिंह व बेटी किरनप्रीत कौर भी मौजूद थे। भाजी सुखप्रीत कौर की उपस्थिति ने परिवार का प्यार और एकता दिखाई।
देशभक्ति से जुड़ी है यह भावना
दविंद्र कौर बबली ने बताया कि उनके भाई ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए हैं। उन्हें गर्व है कि उनके भाई ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि यह बलिदान गांव और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन करता है। उनके लिए भाई की कलाई पर राखी बांधना सिर्फ एक परंपरा नहीं है। यह भावनात्मक और देशभक्ति से जुड़ी पवित्र भावना है। उन्होंने कहा कि हर साल वह इस दिन अपने भाई को याद करती हैं और श्रद्धांजलि देती हैं।
हर वर्ष रक्षाबंधन पर शहीद के बुत पर राखी बांधने का यह सिलसिला कई सालों से चल रहा है। दविंद्र कौर न केवल अपने भाई की शहादत को याद करती हैं, बल्कि देश के लिए बलिदान देने वाले सभी वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करती हैं। परिवार का मानना है कि शहीदों को याद रखना ही उनका सच्चा सम्मान है। इस अवसर पर परिवार ने शहीद अवतार सिंह के बलिदान को याद करते हुए वीर जवानों के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया। यह घटना हमें [भारतीय सेना के वीर जवानों](https://indianarmy.nic.in/) के बलिदान को याद दिलाती है।
देशभक्ति के इस त्योहार का यह स्वरूप प्रेरणादायक है। यह युवाओं को देश सेवा का संदेश देता है। शहीद अवतार सिंह का बुत गांव में उनकी शहादत की याद दिलाता है। बहन का प्यार और शहीद का बलिदान, यह मिलन रक्षाबंधन की सच्ची मिसाल है। इसने गांव कपूरा का नाम पूरे देश में रोशन किया है। ऐसे आयोजनों से [शहीद परिवारों का मनोबल](https://www.india.gov.in/) बढ़ता है और समाज में देशभक्ति की भावना जागृत होती है। दविंद्र कौर का यह कदम हर बहन के लिए प्रेरणा है। उन्होंने दिखाया कि शहीद भाई हमेशा दिल में जीवित रहते हैं।
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