राजस्व मंडल के रजिस्ट्रार पेश होकर बताए क्यों नहीं की आदेश की पालना-हाईकोर्ट

जयपुर, 01 सितंबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने तहसीलदार के निलंबन के मामले में अदालती आदेश की पालना नहीं करने को गंभीर माना है। इसके साथ ही अदालत ने 15 सितंबर को राजस्व मंडल के रजिस्ट्रार को पेश होकर इस संबंध में अपना जवाब देने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस दौरान यदि गत 17 दिसंबर के आदेश की पालना कर ली जाती है तो रजिस्ट्रार को पेश होने की जरूरत नहीं है। जस्टिस अनुरूप सिंघी की एकलपीठ ने यह आदेश भरत कुमार यादव की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

सुनवाई के दौरान बोर्ड की ओर से कहा गया कि उन्होंने अदालती आदेश की पालना में याचिकाकर्ता का अभ्यावेदन गत 18 फरवरी को निस्तारित कर दिया है। इस पर अदालत ने कहा कि यह आदेश केवल दिखावटी है और इसमें पूरे निर्देशों की अनुपालना नहीं की है। इसलिए पुराने आदेश से प्रभावित हुए बिना नया आदेश पारित करें।

याचिका में अधिवक्ता धर्मेन्द्र पारीक ने बताया कि याचिकाकर्ता को एसीबी मामले में जनवरी 2025 में निलंबित कर दिया था। जुलाई 2025 में उसके खिलाफ चार्जशीट पेश हो गई, लेकिन उसे पद पर बहाल नहीं किया। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अजय कुमार चौधरी के मामले में कहा है कि आपराधिक केस में एफआईआर दर्ज होने व चार्जशीट दायर होने के तय अवधि के बाद कर्मचारी को बहाल करना होगा। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए हाईकोर्ट से उसे बहाल करने का आग्रह किया। अदालत ने 17 दिसंबर 2025 को आदेश देते हुए उसे इस संबंध में प्रतिवादीगण के समक्ष प्रतिवेदन देने और प्रतिवादियों को उसे सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसरण में तय करने के लिए कहा। लेकिन विभाग ने आदेश की पालना नहीं की।