जयपुर, 24 सितंबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के थानों में जब्त वाहनों के निस्तारण से जुडे मामले में दायर जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया है। अदालत ने कहा कि वह इन वाहनों के निस्तारण में राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों से संतुष्ट है। ऐसे में जनहित याचिका पर अब सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है। सीजे संजय के. अग्रवाल और जस्टिस इन्द्रजीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश महेश झालानी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह ने अदालत को बताया कि थानों में जब्त पडे वाहनों का पुलिस एक्ट की धारा 38 और बीएनएसएस की धारा 106 के तहत निस्तारण किया जाता है। धारा 38 से जुडे मामले में सबसे पहले परिवहन विभाग की मदद से वाहन मालिक की तलाश की जाती है। यदि वाहन मालिक का पता नहीं चलता तो फिर उसे नीलाम किया जाता है। वहीं धारा 106 के तहत कोर्ट आदेश से वाहन को संबंधित व्यक्ति को सुपुर्द किया जाता है। जिन मामलों में बीमा राशि ले ली जाती है, उस मामले में बीमा कंपनी को वाहन लेने के लिए नोटिस दिया जाता है। यदि बीमा कंपनी जवाब नहीं देती तो फिर वाहन नीलाम किया जाता है। इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से साल 2025 व साल 2026 में वाहनों के निस्तारण से जुड़ा आंकड़ा भी पेश किया गया।
याचिका में अधिवक्ता सतीश खंडेलवाल ने अदालत को बताया कि प्रदेश के सभी थानों में अरबों रुपए के वाहन कई सालों से जब्त पडे हुए हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट सभी राज्यों को इन वाहनों का तय समय में निस्तारण के आदेश दे चुका है। इसके अलावा पालना नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट कठोर कार्रवाई की चेतावनी भी दे चुका है। याचिका में कहा गया विभिन्न थानों में सालों से खुले में वाहन पड़े हैं। सालों तक लावारिस पड़े रहने के कारण अधिकांश वाहन कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं। वहीं बाद में ये वाहन न केवल रोड पर चलने लायक रहते है, बल्कि इनसे दुर्घटनाएं होने का खतरा भी रहता है। याचिका में गुहार की गई है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में इन वाहनों का तय समय पर निस्तारण करने की व्यवस्था की जाए।