जयपुर, 03 अक्टूबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश की तीन ग्राम पंचायतों के सरपंच पद के चुनाव के लिए आरक्षण लॉटरी को रद्द करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही अदालत ने आरक्षण रोटेशन नियम की पालना करते हुए नए सिरे से लॉटरी निकालने के आदेश दिए हैं। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश रविंन्द्र सिंह व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए। रद्द की गई ग्राम पंचायतों में भरतपुर के उच्चैन की बरीघा ग्राम पंचायत, करौली की श्रीमहावीरजी और अकबरपुर पंचायत समिति शामिल हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आदेश की सत्यापित प्रति प्राप्त होने के सात दिन के भीतर लॉटरी प्रक्रिया पूरी की जाए।
याचिकाओं में अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत को बताया कि आरक्षण रोटेशन के नियमों के तहत पंचायत बनने के बाद सरपंच पद के चुनाव के लिए सबसे पहले एससी वर्ग को वरीयता दी जाएगी। साल 1994 के राजस्थान पंचायती राज निर्वाचन नियम लागू होने के बाद पहली बार साल 1995 में इन स्थानों पर एससी वर्ग के लिए सरपंच की सीट आरक्षित रखी गई। इसके बाद से अब तक यहां छह बार चुनाव हो चुके हैं और दो बार एससी वर्ग के लिए सीट आरक्षित रखी गई हैं। याचिका में कहा गया कि आरक्षण सर्किल पूरा होने के लिए जरूरी है कि जिस जाति को आरक्षण का लाभ मिल चुका है, उन्हें लॉटरी में शामिल नहीं किया जाए। इसके बावजूद भी इस बार हो रहे सातवें चुनाव में एससी वर्ग को लॉटरी में शामिल किया गया और उनके लिए ही सीट आरक्षित कर दी गई। जिसके चलते सात बार में से तीन बार एससी वर्ग को प्रतिनिधित्व मिल गया। जिससे आरक्षण रोटेशन नियमों की अवहेलना हुई है। इसलिए इन सीटों पर दिए गए एससी आरक्षण को रद्द किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने तीनों पंचायतों के सरपंच पद के लिए निकाली गई लॉटरी को रद्द करते हुए आरक्षण रोटेशन से नए सिरे से लॉटरी निकालने के आदेश दिए हैं।