स्वदेशी रक्षा अनुसंधान के लिए आईआईटी रुड़की और इंडिया ऑप्टेल में समझौता

रुड़की, 05 अक्टूबर । भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की और रक्षा मंत्रालय के अधीन भारत सरकार के उपक्रम इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड ने स्वदेशी रक्षा अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए हाथ मिलाया है। दोनों संस्थानों ने देहरादून में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

इस साझेदारी का उद्देश्य रक्षा अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, क्षमता निर्माण और उद्योग-शिक्षा सहभागिता को मजबूत करना है।

सोमवार को आईआईटी रुड़की के मीडिया विभाग द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार समझौते के तहत नवाचार, स्वदेशीकरण, प्रशिक्षण, प्रशिक्षुता, अनुसंधान और आपसी हित की गतिविधियों में सहयोग किया जाएगा। इसमें आईआईटी रुड़की की बहुविषयी अनुसंधान क्षमता और इंडिया ऑप्टेल की रक्षा प्रौद्योगिकी विशेषज्ञता का लाभ लिया जाएगा।

आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा कि यह सहयोग शैक्षणिक अनुसंधान को देश की रणनीतिक रक्षा जरूरतों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

यह संयुक्त अनुसंधान, विद्यार्थी सहभागिता और प्रौद्योगिकी विकास के अवसर पैदा करेगा। हम स्वदेशी क्षमता में योगदान और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने के लिए तत्पर हैं।

इंडिया ऑप्टेल की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शर्मिष्ठा कौल शर्मा ने कहा कि आईआईटी रुड़की के साथ साझेदारी स्वदेशी अनुसंधान और तकनीकी आत्मनिर्भरता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह सहयोग महत्वपूर्ण रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने और सशस्त्र बलों के लिए भविष्य के समाधान विकसित करने में मदद करेगा।

समझौते पर आईआईटी की ओर से प्रायोजित अनुसंधान एवं औद्योगिक परामर्श के अधिष्ठाता प्रो. विवेक कुमार मलिक और इंडिया ऑप्टेल की ओर से मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी नितेश गोयल ने हस्ताक्षर किए

इस अवसर पर विशाल गर्ग, शंभु शर्मा, प्रो. तरुण शर्मा, प्रो. संजीव मनहास सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।