हरिद्वार, 05 अक्टूबर । स्त्री को पुरुष के समान गरिमा, स्वतंत्रता और सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार है। भाषा, धर्म और वर्ग के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। यह बात प्रो. सिंधु टी.आई. ने केंद्रीय हिंदी निदेशालय की व्याख्यानमाला के तहत गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय में कही। उन्होंने मलयालम की चर्चित कहानियों के माध्यम से स्त्री शोषण, स्त्री-पुरुष संबंध, अस्मिता और अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने की स्वतंत्रता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
प्रो. सिंधु ने घरेलू हिंसा के संदर्भ में संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की जानकारी को जरूरी बताते हुए कहा कि अधिकारों के प्रति जागरूकता का अभाव कई बार उत्पीड़न की स्थिति को और गंभीर बना देता है। प्रत्येक नागरिक को सम्मान, स्वतंत्रता और सुरक्षा के साथ जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने मलयालम की कहानियों के माध्यम से स्त्री जीवन से जुड़े विभिन्न सवालों को रेखांकित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मानविकी संकाय की डीन प्रो. मुदिता अग्निहोत्री ने की। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारतीय साहित्य और लेखकों की हिंदी दृष्टि को समझने में इस तरह के व्याख्यान महत्वपूर्ण हैं। इससे देश के विभिन्न भाषाई और सांस्कृतिक क्षेत्रों को समझने का अवसर मिलता है।
संचालन डॉ. अजित तोमर ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. निशा शर्मा ने किया। इस अवसर पर डॉ. रोशन लाल, डॉ. मोहनी कुमार, शुकून, आस्था, रिंकू यादव, शोभा, अंजलि, मोनिका, दिव्यांशु, जोगेंद्र कुमार सहित शोधार्थी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।