शिक्षा समाज में सकारात्मक परिवर्तन की आधारशिला: ब्रजेश पाठक

लखनऊ, 12 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सोमवार को लखनऊ में आयोजित ‘शैक्षिक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा समाज में सकारात्मक परिवर्तन की आधारशिला है। शिक्षकों का समर्पण, विद्यार्थियों की प्रतिभा और शिक्षा के प्रति समाज की प्रतिबद्धता ही एक सशक्त, संस्कारित एवं विकसित भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करती है।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों एवं प्रतिभाओं का अभिनंदन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को ज्ञान प्रदान करने का कार्य नहीं करते, बल्कि उनके व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों के विकास और बेहतर समाज की नींव रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही समाज में जागरूकता, सकारात्मक सोच और विकास की भावना को मजबूत किया जा सकता है। विद्यार्थियों की प्रतिभा को उचित अवसर और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना तथा शिक्षकों के योगदान को सम्मान देना विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

श्री पाठक ने कहा कि शिक्षकों और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली प्रतिभाओं का सम्मान समाज को प्रेरणा देता है। ऐसे आयोजन शिक्षा के प्रति नई ऊर्जा, उत्साह और जिम्मेदारी का भाव पैदा करते हैं। कार्यक्रम में राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्त, भाजपा के लखनऊ महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी, विजय सोनी व विजय कुमार भुर्जी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, प्रखर समाजवादी चिंतक एवं महान विचारक डॉ. राममनोहर लोहिया की पुण्यतिथि के अवसर पर डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में स्थापित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने डॉ. लोहिया के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण करते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन सामाजिक न्याय, समानता और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए व्यतीत हुआ। उन्होंने समाज में व्याप्त असमानताओं को दूर करने तथा प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए आजीवन प्रयास किया।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. राममनोहर लोहिया के विचार केवल एक राजनीतिक दर्शन तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने और सामाजिक समरसता स्थापित करने की प्रेरणा भी देते हैं।