पठानकोट: कल टॉवर से उतरेंगे बुजुर्ग? समिति-प्रशासन सहमति

पठानकोट में 50 दिन बाद समाप्त हुआ बुजुर्गों का धरना

पठानकोट में डीसी आवास के सामने लगभग 200 फीट ऊंचे बिजली टॉवर पर धरना दे रहे दो बुजुर्गों का आंदोलन सोमवार देर शाम समाप्त हो गया। 82 वर्षीय कुलविंदर सिंह और 85 वर्षीय शरम सिंह पिछले 50 दिनों से टॉवर पर डटे हुए थे। जिला प्रशासन ने कई दौर की वार्ता के बाद उन्हें नीचे उतरने के लिए राजी किया। डीसी पल्लवी और एडीसी अर्शदीप सिंह ने बुजुर्गों से बातचीत की। प्रशासन ने हाइड्रोलिक क्रेन मंगवाई। लेकिन बुजुर्गों ने सोमवार रात उतरने से इनकार कर दिया।

सुबह 8 बजे उतरेंगे बुजुर्ग, स्वास्थ्य कारण बना आधार

बुजुर्गों ने कहा कि वे मंगलवार सुबह 8 बजे टॉवर से नीचे उतरेंगे। उन्होंने बताया कि 2 फीट के प्लेटफॉर्म पर इतने दिन रहने से उनके घुटने काम नहीं कर रहे। रात में उन्हें कम दिखाई देता है। इसलिए वे रात को क्रेन से नहीं उतरेंगे। एडीसी अर्शदीप सिंह ने बताया कि प्रदर्शनकारियों के साथ कई दिनों से बातचीत चल रही थी। अब दोनों पक्षों में सहमति बन गई है। प्रशासन ने बैराज औस्ती संघर्ष समिति को पूरा आश्वासन दिया है। उनकी मांगों को सरकार के समक्ष मजबूती से रखा जाएगा।

33-34 साल पुराना है शाहपुरकंडी बराज मुद्दा

एडीसी ने कहा कि शाहपुरकंडी बराज या डैम प्रोजेक्ट का मुद्दा लगभग 33-34 साल पुराना है। नेगोशिएशन एक धीमी प्रक्रिया है। इन पेचीदा मुद्दों का निपटारा करते समय कानूनी पहलुओं को भी देखना पड़ता है। प्रशासन सकारात्मक नजीरिया अपना रहा है। लेकिन कानून और पॉलिसी को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इन सभी बातों का हल बातचीत की मेज पर ही निकलेगा। उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह चंडीगढ़ में सीएम के साथ प्रभावित परिवारों की बैठक करवाई जाएगी।

24 घंटे मिली सुरक्षा, खाना और मेडिकल सहायता

एडीसी ने बताया कि 50 दिनों के इस घटनाक्रम में प्रशासन ने राउंड द क्लॉक सुरक्षा के लिए पुलिस गार्ड तैनात किया। लाइट, खाने और स्वास्थ्य सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा गया। एक मेडिकल टीम हर समय मौके पर मौजूद रही। बुजुर्गों के स्वास्थ्य की जांच होती रही और जरूरी दवाएं दी जाती रहीं। सोमवार को बुजुर्गों को सुरक्षित नीचे उतारने के लिए 120 फीट ऊंची क्रेन मंगवाई गई। बैराज औस्ती संघर्ष समिति अध्यक्ष दयाल सिंह ने बताया कि डीसी, एडीसी और बांध प्रशासन के अधिकारियों ने बुजुर्गों से बात की। उन्हें आश्वासन दिया गया कि अगले सप्ताह सीएम के साथ बैठक होगी।

बुजुर्गों की बिगड़ती सेहत से बढ़ी चिंता

दयाल सिंह ने कहा कि बुजुर्गों की लगातार बिगड़ती सेहत से चिंता बढ़ रही थी। इसी कारण उन्हें नीचे उतरने पर सहमति जताई गई। उन्होंने कहा कि 34 साल से मांगों को पूरा करने की बजाए सिर्फ बैठकों पर जोर दिया गया। अगर इस बार भी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वे संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे। यह मामला पठानकोट और शाहपुरकंडी बराज से जुड़ा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही समाधान निकाला जाएगा। बुजुर्गों का यह धरना पठानकोट में चर्चा का विषय बना रहा।

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जिला प्रशासन पठानकोट
पंजाब सरकार
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