शिमला, 14 अक्टूबर । हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में अगले शैक्षणिक सत्र से नैतिक शिक्षा शुरू की जाएगी। इसके लिए पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को लाहौल स्पीति जिला की स्पीति घाटी के काजा स्थित सीबीएसई स्कूल के विद्यार्थियों से संवाद के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। पर्यावरण बचेगा, तभी हम भी बचेंगे।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के सवाल सुने और उनकी समस्याओं पर चर्चा की। विद्यार्थियों ने काजा स्कूल को सीबीएसई से संबद्ध करने के लिए उनका आभार जताया। उन्होंने कहा कि दूरदराज के स्पीति क्षेत्र में सीबीएसई पाठ्यक्रम से पढ़ने का अवसर मिलना उनके लिए महत्वपूर्ण है।
संवाद के दौरान एक छात्रा ने बताया कि स्कूल में 85 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, जिनमें से 46 छात्राएं छात्रावास में रहती हैं। उसने छात्रावास में रसोइये, सफाई कर्मचारी और महिला वार्डन की कमी का मामला उठाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग छात्र और छात्रा छात्रावास बनाए जाएंगे। शिक्षकों के लिए भी अलग आवासीय ब्लॉक तैयार किया जाएगा। उन्होंने स्कूल के विकास के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया।
एक छात्रा ने पाठ्यक्रम में पर्यावरण अध्ययन शामिल करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने इस सुझाव की सराहना की। विद्यार्थियों ने कक्षाओं में ठंड और पर्याप्त रोशनी नहीं होने से पढ़ाई में आने वाली परेशानियों की जानकारी भी दी। मुख्यमंत्री ने स्कूल के भवन और सुविधाओं में सुधार के लिए धन उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल को बेहतर स्वरूप देने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे और इसे अगले शैक्षणिक सत्र तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
एक विद्यार्थी के स्पीति दौरे के अनुभव से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। राज्य सरकार यहां पर्यटन से जुड़ी परियोजनाएं विकसित कर रही है, जिससे स्थानीय लोगों की आय और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि हिमाचल दिवस का आयोजन यहां किए जाने के बाद पर्यटकों की संख्या बढ़ी है। क्षेत्र में आइस हॉकी स्टेडियम का निर्माण भी किया जा रहा है, जिससे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन की संभावनाएं बढ़ेंगी।
एक छात्र ने स्पीति के विद्यार्थियों के लिए विशेष कोचिंग शुरू करने का आग्रह किया, जिससे उन्हें पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए घाटी से बाहर न जाना पड़े। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि यहां जल्द कौशल प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू करने पर भी विचार किया जाएगा, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकें।