हाईकोर्ट का फर्जी आदेश तैयार करने को लेकर रजिस्ट्रार करें जांच, विधायक पुत्र पर है आरोप

जयपुर, 29 अक्टूबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने वोटर बनने के लिए हाईकोर्ट का फर्जी आदेश तैयार करने से जुड़े मामले में न्यायिक रजिस्ट्रार को कहा है कि वह इस संबंध में जांच करें और तीन दिन में अदालत में अपनी रिपोर्ट पेश करें। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश सूरजगढ़ से कांग्रेस विधायक श्रवण के पुत्र जयप्रकाश की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कथित आदेश की फोटो कॉपी की तुलना मूल आदेश से की। जिसमें पाया कि 16 अक्टूबर को अदालत ने कोई अंतरिम आदेश पारित करने के बजाए मामले की सुनवाई टाली थी। वहीं निर्वाचन आयोग की ओर से अधिवक्ता अमित कुडी ने पंचायत समिति, सुरजगढ के निर्वाचन अधिकारी की ओर से गत 16 अक्टूबर को जारी पत्र पेश किया। इस पत्र में कहा गया था कि याचिकाकर्ता ने इस याचिका में 16 अक्टूबर को पारित कथित आदेश की कॉपी पेश की है। इस कथित आदेश के अनुसार हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष में अंतरिम आदेश पारित कर उसका नाम ग्राम पंचायत जीणी के वार्ड संख्या 5 की मतदाता सूची में पुन: शामिल करने और उसे नामांकन पत्र स्वीकार करने को कहा गया था।

निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जांच में सामने आया है कि यह याचिका 16 अक्टूबर को दूसरी एकलपीठ के समक्ष लिस्ट हुई थी, लेकिन उसमें कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं हुआ था। इससे स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता ने अनुचित लाभ प्राप्त करने और प्राधिकारियों को गुमराह करने के उददेश्य से इस प्रकार के जाली आदेश के आधार पर निर्वाचन प्रक्रिया में भाग लेने का प्रयास किया है। इसलिए याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं याचिकाकर्ता के अधिवक्ता इस तथ्य से इनकार करने की स्थिति में नहीं रहे और उनकी ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता के ऐसे आचरण के चलते वे कठिनाई का सामना कर रहे हैं और उनसे भी जांच की जा रही है। जिस पर सुनवाई अदालत ने न्यायिक रजिस्ट्रार को जांच के आदेश दिए है।

गौरतलब है कि याचिकाकर्ता याचिकाकर्ता का नाम सूरजगढ नगर पालिका के वार्ड नंबर 25 में है। पंचायत चुनाव के लिए जीणी पंचायत में वोटर बनने के लिए उसने आवेदन किया, लेकिन समय बीतने के कारण बीएलओ ने नाम जोडने से मना कर दिया। इस पर उसने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। जिसकी 16 अक्टूबर को सुनवाई हुई और कोर्ट ने अंतरिम आदेश दिए बिना मामले की सुनवाई टाल दी।