पंजाब के मोहाली police ने पुराने नोट बदलने के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े गैंग का पर्दाफाश किया है। इस मामले में 1 अक्टूबर 2025 को गुपचुप FIR दर्ज की गई थी और डेढ़ माह की कड़ी जाँच के बाद अब पुलिस ने 12 आरोपियों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज कर लिया है। पहली बड़ी गिरोहवार ठगी सुनार से 7 करोड़ रुपये की मांगने और भुगतान की रकम देने की थी, जबकि इनके पास से 9 करोड़ रुपये के नकली नोट भी बरामद किए गए हैं जो एक स्कॉर्पियो गाड़ी में मिले। महाराष्ट्र, जीरकपुर, लुधियाना, दिल्ली सहित अन्य राज्यों के अज्ञात ठग भी इस नेटवर्क से जुड़े बताये जा रहे हैं, और अब मोहाली पुलिस SIT (Special Investigation Team) के ज़रिये इनकी ठगी की धारा खोलने में जुटी है। इस मुल्तान-जाँच के दौर में सचिन व गुरदीप सिंह, जो हरियाणा के कुरुक्षेत्र के निवासी बताए गए, को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य साथियों की खोज जारी है।
जाँच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने पुराने 500 और 1000 रुपए के नोट-बदले जाने के बहाने फर्जी कंपनियों की एक पूरी नेटवर्क बनाई। पहली बार गुजरात के गांधीनगर स्थित दीक्षा कॉर्पोरेशन नामक कंपनी को जालसाजी के लिए इस्तेमाल किया गया, और इसकी रसीदें व आईकार्ड तक पीड़ित के समक्ष पेश किए जाते थे ताकि वह भरोसा कर बैठे। कई माह तक रकम जमा कर लेने के बाद कमीशन न मिलने पर पीड़ित ने जब फोन किया, तो आरोपियों ने संपर्क बंद कर लिया। इस तरह की धांधली से हीजिन कंपनी की वास्तविक अस्तित्व पर सन्देह उठने लगा और पीड़ित ने असल हकीकत पता करना शुरू किया।
फिर ठगों ने जीरकपुर में डेटा कलेक्शन के लिए नई फर्जी कंपनी तैयार की और स्थानीय युवाओं को शामिल कर saját तौर पर छोटे-छोटे प्रोजेक्ट दिखाकर काम कराया। 15 से 20 दिन से अधिक समय तक किसी को न रखने और किसी न किसी बहाने से निकाल देने जैसी रणनीतियाँ अपनाई गईं ताकि पुलिस के पाश में न आएं। इस दौरान गिरोह के सदस्य पूंजी-सम्पन्न लाइफस्टाइल अपनाते रहे—लग्जरी कारों, क्लब-होटलों में पार्टियाँ और बड़े लोगों से रिश्ते बनाने के नाम पर सामाजिक रसूख दिखाने का दिखावा। यही लिंक बड़े स्तर की ठगी के लिए इस्तेमाल होते रहे और कई राजनेताओं एवं पुलिस अधिकारियों के साथ इनके कथित संबंध भी सामने आए।
उच्चस्तरीय जाँच के परिणामस्वरूप बताया गया है कि ठगों की पहचान एक-से-एक राजनीतिक-व्यावसायिक नेटवर्क से जुड़ी है, जिससे वे हर नई कार्रवाई से पहले ही अवगत रहते थे। अब इन आरोपियों के खिलाफ नकली नोट बनाने के धाराओं के अलावा ठगी, धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेजों के कई सेक्शन भी जोड़े गए हैं। पुलिस ने इनकी गिरफ्तर के लिए एक विशेष टीम बनाई थी और चार दिनों के भीतर गिरफ्तारी संभव हो सकी, जबकि इनके दस अन्य साथियों की गिरफ्तारी के लिए कड़े प्रयास जारी हैं, जिनमें एक महिला भी शामिल बताई जा रही है।
पुलिस ने इस मामले से जुड़े कई राज्यों में संचालित ठगी की प्रवृत्ति पर भी प्रकाश डाला है—इनका असल ठेका विभिन्न राज्यों से करोड़ों की ठगी कर दूसरी जगहों पर पलायन कर जाना है। राजस्थान, गुजरात के साथ-साथ मध्य प्रदेश के लोगों के साथ भी उनके धोखे सामने आए हैं। फर्जी कंपनी, नकली पहचान-पत्र और डेटा कलेक्शन के बहाने पीड़ितों को फंसाकर वे नोट बदलवाने के नाम पर रकम हड़पते थे। इस मामले में आरोपियों के विरुद्ध डी-डाक्यूमेंटेशन के साथ FIR और धाराओं के तहत कारवाई होगी, और अग्रिम जाँच में नई जानकारियाँ आ रही हैं। अधिक अपडेट के लिए देखें Punjab Police और NDTV.
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