बठिंडा की ‘इंस्टा-क्वीन’ अमनदीप कौर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत दर्ज मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से regular bail मिल गई है. जस्टिस अमन चौधरी की खंडपीठ ने 17 नवंबर को अमनदीप कौर को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। वह सोशल मीडिया पर अपनी पहचान के कारण कई लोगों के बीच “मेरी जान” के नाम से भी लोकप्रिय थीं, जिसे जनता ने न τηνें भी पहचाना है.
विजिलेंस ब्यूरो, बठिंडा द्वारा 26 मई को दर्ज FIR संख्या 15 के तहत अमनदीप कौर पर 13(1)(B) के साथ 13(2) की धाराओं के दायरे में मामला चल रहा है. आरोप यह है कि 1 अप्रैल 2018 से 31 मार्च 2025 के बीच सात साल की अवधि में उनके पास 48 लाख रुपए की अनुपातहीन संपत्ति जमा थी. यह आरोप आत्म-सम्पत्ति बनाम आय के अंतर से जुड़ा हुआ माना गया है. अधिकतम साक्ष्यों और गवाहों के कारण मामले की प्रकृति बेहद संवेदनशील बताई गई है.
याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील डॉ. अनमोल रतन सिद्धू ने अदालत को बताया कि अमनदीप कौर लगभग छह महीने से हिरासत में थीं; राज्य द्वारा प्रस्तुत custody certificate के अनुसार वह 5 महीने और 19 दिन jail में रहीं। चालान 14 नवंबर को पेश किया गया, लेकिन अब तक आरोप तय नहीं हुए हैं. इस मामले में कुल 46 गवाह बताए गए हैं, जिससे ट्रायल की गति में देरी की संभावना जताई जा रही है. कोर्ट ने माना कि आगे की कैद संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निहित व्यक्तिगत जीवन के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है, और यह भी कि वह NDPS Act के एक अन्य मामले में भी जमानतपर है.
जमानत देते समय अदालत ने अमनदीप कौर पर कई शर्तें भी लगाईं: उन्हें ट्रायल कोर्ट/ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष नियमित बांड प्रस्तुत करना होगा और ट्रायल के दौरान कोई साक्ष्य मुवन/छेड़छाड़ नहीं करनी होगी; अभियोजन पक्ष के गवाहों पर दबाव डालना या धमकाना नहीं जाएगा; ट्रायल कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ना है; मुकदमे की समाप्ति तक अपना पता और मोबाइल नंबर न बदलना होगा. न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की वास्तविक भर्ती हालात, गवाहों की संख्या और जांच-प्रक्रिया के कारण ज़मानत जारी रखना उचित और आवश्यक है ताकि संविधान के अनुच्छेद 21 के अधिकार का संतुलन बना रहे.
इस खबर को भी पढ़ें: Prevention of Corruption Act: overview और Disproportionate assets: overview ताकि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और अनुपातहीन संपत्ति के मामलों की पृष्ठभूमि समझ सकें. यह मामला अभी कानून-व्यवस्था की दृष्टि से चल रहा है और आगे की जांच और ट्रायल के दौरान अक्टूबर/नवंबर 2025 के आसपास ताजा घटनाक्रमों पर नजर रखना आवश्यक है.
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