गुरु नानक खालसा कॉलेज: देखें क्रिएटिव बिजनेस आइडियाज

लुधियाना के गुरु नानक खालसा कॉलेज फॉर वुमेन में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के अंतर्गत महिला विकास प्रकोष्ठ ने अर्थशास्त्र विभाग के सहयोग से एक विशेष कार्यक्रम के रूप में “महिला उद्यमिता दिवस” का आयोजन किया। यह आयोजन महिलाओं के कौशल-आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और छात्राओं में आत्मनिर्भरता की नई दिशा दिखाने के उद्देश्य से किया गया, ताकि शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक अवसरों की दिशा में उनका मार्गदर्शन संभव हो सके। कार्यक्रम ने महिलाओं के आर्थिक साक्षरता और व्यवसायिक कौशल के विकास पर जोर दिया औरطلاب-छात्राओं को उद्यमिता के पथ पर प्रोत्साहित करने के लिए एक ठोस प्लेटफॉर्म दिया। आयोजन की प्रमुख भूमिका निभाने वाले आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ और महिला विकास प्रकोष्ठ ने इसे एक संरचित और प्रेरक मंच बनाने में अहम कदम उठाया, जो शिक्षकों-छात्राओं के बीच एक सुदृढ़ पुल का काम कर गया। इस मौके पर उद्यमशीलता के मूल सिद्धांतों को लेकर चर्चा-चर्चाएं हुईं और प्रोत्साहन के साथ व्यवहारिक दिशा-निर्देश भी साझा किए गये, ताकि छात्राएं अपने कौशल को व्यावसायिक रणनीतियों के साथ जोड़कर भविष्य के लिए योजनाबद्ध कदम उठा सकें।

कार्यक्रम में छह युवा उद्यमी प्रतिभागियों ने अपने कौशल को एक पेशेवर व्यवसाय के रूप में ढालने की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास दिखाए। मेहंदी, नेल आर्ट, किशमिश कला, क्रोशिया और बेकिंग जैसे कौशलों को उन्होंने दर्शकों के सामने उत्पादों के रूप में प्रस्तुत किया, जिन्हें उनकी टीम ने स्टॉल-शो में neatly सजाकर रखा और विद्यार्थी समूहों को आकर्षित किया। इस दौरान प्रतिभागियों ने अपने उत्पादों के बारे में संक्षिप्त प्रदर्शन किए, सोशल मीडिया हैंडल साझा किए और अपनी उद्यमी यात्रा के ठोस अनुभवों के बारे में सुनाया। छात्राओं ने अपनी कहानी में संघर्ष, सीख और सफलता के क्षणों को बखूबी रेखांकित किया, जिससे अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिली कि अनुशासन और निरंतर अभ्यास से छोटे-छोटे कौशल बड़े व्यवसाय बन सकते हैं।

संकाय सदस्य और अर्थशास्त्र विभाग के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने प्रत्येक प्रतिभागी की कड़ी मेहनत की सराहना की और उनके प्रस्तुतीकरण, गुणवत्ता नियंत्रण और ग्राहक संपर्क कौशल की भी तारीफ की। उन्होंने फीडबैक के साथ-साथ सुधार के सुझाव भी दिए ताकि ये युवा उद्यमी अपने उत्पादों की ब्रांडिंग, मूल्य निर्धারণ और डिजिटल मार्केटिंग जैसी क्षेत्रों में आगे बढ़ सकें। इस बातचीत से यह स्पष्ट हुआ कि कॉलेज की शिक्षा-व्यवस्था केवल कॉपी-वर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक जीवन के व्यवसायी पहलुओं से भी जुड़ती है। विद्यार्थिनीों को प्रेरित कर उन्हें सुदृढ़ entrepreneurial mindset विकसित करने पर जोर दिया गया ताकि वे अपने कौशल से स्थायी आय स्रोत बना सकें और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा कर सकें।

प्रिंसिपल डॉ. मनीता काहलों ने छात्राओं को अपने हुनर को निरंतर निखारने और उन्हें सफल व्यवसायों में बदलने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास, उचित मार्गदर्शन और प्रासंगिक पाठ्यक्रम के साथ-साथ संरक्षित संसाधनों का सही उपयोग ही महिलाओं के उद्यमिता journeys को मजबूत बनाता है। प्राचार्य ने कार्यक्रम की सफलता को विद्यार्थियों के आत्म-निर्भर बनने की दिशा में एक ठोस कदम करार दिया और भविष्य के लिए संस्थान-स्तर पर ऐसे मार्गदर्शन कार्यक्रम जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि शिक्षा के साथ-साथ उद्यमिता से जुड़ी क्षमता विकसित करना आज के दौर की अनिवार्यता है, ताकि महिलाएं विकसंस्थाओं, स्टार्टअप्स और अपनी खुद की छोटी-छोटी कंपनियों को सफलतापूर्वक चला सकें। अधिक जानकारी और संदर्भ के लिए देखें: उद्यमिता पर पन्ना और यूएन वूमेन के मार्गदर्शक पन्ने UN Women। यह संयोजन मान्य और सुलभ जानकारी के साथ कार्यक्रम की भविष्य की उपलब्धियों के लिए एक प्रेरक मॉडल बनकर आया। साथ ही, यह पहल गहरे स्तर पर यह संदेश दे गई कि महिला शिक्षा और उद्यमिता एक साथ चलेंगे तो समाज में आर्थिक सशक्तिकरण संभव है, और यह कदम शिक्षा-से-व्यवसाय तक के ज्ञान के रास्ते को मजबूत करेगा।