पंजाब: NOC में देरी पर कांग्रेस का आरोप—“जानबूझकर रोकी जा रही फाइलें”

स्थिति का संक्षिप्त विवरण

पंजाब में जिला परिषद और ब्लॉक समिति के नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उम्मीदवार एनओसी के लिए सरकारी दफ्तरों की राह में हैं। कई जगह अधिकारी दफ्तरों में उपलब्ध नहीं हैं। इससे नामांकन प्रक्रिया में देरी की शिकायतें आ रही हैं। कांग्रेस केप्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने राज्य चुनाव आयुक्त को इस बारे में शिकायत भेजी है। उनका कहना है कि विपक्षी दलों को चुनाव लड़ने से रोकने की साजिश चल रही है। उनकी चिंता है कि अफसरों की अनुपस्थिति से उम्मीदवारों को एनओसी मिलने में काफी समय लग रहा है।

एनओसी देरी के पीछे साजिश के आरोप

राजा वड़िंग ने राज्य चुनाव आयुक्त को विस्तृत शिकायत भेजी है। वह कहते हैं अधिकारी दफ्तरों से गायब रहते हैं; उम्मीदवारों को चक्कर लगाने पड़ते हैं। नामांकन प्रक्रिया में देरी केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि विरोधी उम्मीदवारों को रोकने की साजिश है। कई जिलों से उम्मीदवारों ने शिकायत दर्ज कराई है कि एनओसी जारी करने वाले अधिकारी समय पर उपलब्ध नहीं होते। कर्मचारी लाइन में खड़े रहने के बावजूद स्पष्ट जवाब नहीं देते। इस समस्या से विपक्ष के प्रत्याशियों को नुकसान हो रहा है। वड़िंग ने इसे लोकतंत्र की पारदर्शिता पर भी असर बताया। उन्होंने राज्य चुनाव आयुक्त से कड़े कदम उठाने की मांग की。

विपक्ष के आरोप और लोकतांत्रिक प्रभाव

कथित साजिश के तहत विपक्ष के नामांकन रोके जाने का आरोप कांग्रेस ने लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि यह सरकार विपक्षी दलों को चुनाव से दूर रखने की रणनीति है। प्रशासन का तामझाम बताते हुए उन्होंने कहा कि एनओसी में देरी के लिए उच्चस्तर पर निर्देश दिए जाते हैं। कई जिलों में उम्मीदवारों के पंजीकरण के सामने लंबी लाइनों से अफसर गायब दिखे। कथित तौर पर प्रशासन ने एनओसी प्रक्रिया में समय बढ़ाने के लिए कई चरणों की बाध्यताएं डालीं। यह कदम विपक्षी उम्मीदवारों के नुकसान और मतदान प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर असर डाल रहा है। कांग्रेस ने कहा कि ऐसे मामलों पर कठोर अनुशासनिक कदम उठाने चाहिए ताकि चुनाव निष्पक्ष हों। विपक्ष के प्रचार-प्रसार में भी असमंजस है और नामांकन में देरी होती दिख रही है। इसका राजनीतिक लाभ सत्ता पक्ष को किसी न किसी रूप में मिल सकता है।

कार्रवाई की मांग और बाहरी स्रोत

उन्होंने राज्य चुनाव आयुक्त से तेज और निर्णायक कार्रवाई की मांग की है। हमें ऐसे अफसरों के खिलाफ कठोर अनुशासनिक कदम चाहिए ताकि नामांकन प्रक्रिया सुधरे। राज्य चुनाव आयुक्त को शिकायत की पूर्ण समीक्षा और समयबद्ध निर्देश देने चाहिए। यह कदम लोकतंत्र की पारदर्शिता बनाए रखेगा, और उम्मीदवारों के समुचित अवसर सुनिश्चित करेगा। प्रशासनिक लापरवाही जैसी घटनाओं पर भी सख्त चेतावनी दी जाए और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो। साथ ही कार्यालयों से जानकारी और जवाबदेही बढ़ाने के लिए Punjab State Election Commission की स्थिति स्पष्ट हो। Election Commission of India भी मतदाताओं के अधिकारों के संरक्षण में भूमिका निभाए।

Related: चंडीगढ़: जिम जाते युवक की 5 गोलियों से हत्या, फोटो वायरल