पीड़ित की जमीन पर सुनवाई से न्याय बनता है सरल और पारदर्शी : एसडीएम

राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर तहसील घाटमपुर में शनिवार को राजस्व प्रशासन ने एक प्रभावी और जनोन्मुखी पहल करते हुए ग्रामीण न्याय की नई मिसाल पेश की। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बंटवारा वाद, अभिलेख दुरुस्ती और विवादित वरासत से जुड़े मामलों के निस्तारण का विशेष अभियान चलाया गया।

जमीन से जुड़े विवाद अक्सर आम आदमी के लिए सबसे बड़ी मानसिक और आर्थिक परेशानी का कारण बनते हैं। इसी समस्या को सुलझाने और न्याय प्रक्रिया को आम जनता के करीब लाने के लिए प्रशासन ने एक सराहनीय पहल की है। उपजिलाधिकारी (एसडीएम) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि पीड़ित की जमीन पर जाकर सुनवाई करने से न्याय न केवल सरल होता है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता भी आती है।

मौके पर सुनवाई के क्या हैं फायदे

अक्सर कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते हुए पीड़ित अपनी बात सही ढंग से नहीं रख पाता। एसडीएम के अनुसार, जब राजस्व विभाग की टीम और अधिकारी सीधे उस विवादित जमीन पर पहुँचते हैं, तो मामले की सच्चाई तुरंत सामने आ जाती है।

  1. भ्रम की स्थिति खत्म होना: कागजों और नक्शों की तुलना में मौके की स्थिति (Physical Verification) देखने से सीमा विवाद या अवैध कब्जे जैसी समस्याओं को समझना आसान हो जाता है।

  2. दोनों पक्षों की मौजूदगी: मौके पर अक्सर गांव के बुजुर्ग और आस-पड़ोस के लोग भी मौजूद होते हैं, जिससे गवाही और साक्ष्यों की पुष्टि तुरंत हो जाती है।

  3. पारदर्शिता: जब सबके सामने पैमाइश या जांच होती है, तो पक्षपात के आरोप कम हो जाते हैं और जनता का विश्वास प्रशासन पर बढ़ता है।

भ्रष्टाचार पर लगाम और समय की बचत

एसडीएम ने जोर देकर कहा कि इस प्रक्रिया से बिचौलियों और भ्रष्टाचार को खत्म करने में मदद मिलती है। पीड़ित को महीनों तक दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। “ऑन द स्पॉट” सुनवाई से कई मामलों का निस्तारण उसी दिन हो जाता है, जिससे अदालतों पर बोझ कम होता है और गरीब किसान या मजदूर का कीमती समय और पैसा बचता है।

प्रशासन की अपील

प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे अपनी शिकायतों को बिना डरे दर्ज कराएं। सरकार की प्राथमिकता है कि किसी भी पीड़ित की जमीन पर दबंगों का कब्जा न रहे और हर व्यक्ति को उसका हक मिले। जमीन पर सुनवाई की यह पहल ‘सुशासन’ की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है।