Rajona Letter News: जेल से अकाल तख्त को पत्र, पंथक मुद्दों पर चिंता

केन्द्रीय जेल पटियाला से बलवंत सिंह राजोआना का पंथीय जागरूकता संदेश

केन्द्रीय जेल पटियाला में बंद बलवंत सिंह राजोआना ने पंथ के लिए गम्भीर चिंता जताई है। उन्होंने जेल से लिखे अपने पत्र में अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज को संबोधित किया। राजोआना ने कहा कि पंथ की आवाज संसद और सरकार तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंचती। उन्होंने पूछा कि क्या अकाल तख्त साहिब की आवाज इतनी कमजोर हो गई है। पत्र में उन्होंने कहा कि शहादत दिवस का नाम बदलकर वीर बाल दिवस बनाना पंथ की गरिमा को चोट देता है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि पंथ की आवाज कमजोर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पंथ को चढ़दी कला में बनाए रखने की वकालत की और राजनीतिक दबाव से दूर रहने को कहा। राजोआना ने यह भी लिखा कि अकाल तख्त साहिब को किसी राजनीतिक दबाव से कमजोर न रहने दें।

शहादत दिवस और पंथ की गरिमा को चुनौती देने वाले कदम

उन्होंने स्पष्ट किया कि शहादत दिवस का नाम बदकर वीर बाल दिवस बनाने से पंथ की गरिमा घायल होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सांसदों से मदद मांगना एक गलत कदम है। ऐसे प्रयास से पंथ की प्रतिष्ठा पर सवाल उठते हैं, उन्होंने लिखा। राजोआना ने आगे कहा कि जिन सांसदों से मदद मांगी गई, वे कई कांग्रेस के सदस्य हैं। इतिहास के वर्षों में सिखों पर अत्याचार हुए, यह तथ्य याद दिलाने की जरूरत है, उन्होंने कहा। ऐसे सांसदों से संबंध बनाना शहीदों के बलिदान का अपमान है, उन्होंने जोर देकर कहा। पंथ की आवाज को चढ़दी कला में बनाए रखने के लिए राजनीति से दूर रहने पर बल दिया गया। उन्होंने कहा कि पंथ की आवाज महिलाओं और युवाओं सहित समाज के सभी वर्गों के लिए प्रेरणा बने।

पंथ की स्वतंत्रता और दबाव मुक्त आवाज़ का आग्रह

राजोआना ने कहा कि पंथ को राजनीतिक दबाव से दूर रखना चाहिए ताकि उसकी गरिमा टिकी रहे। उन्होंने सुझाव दिया कि शहीद साहिबजादों के शहादत दिवस का नाम साहिबजादे शहादत दिवस रखा जाए। पंथ अपनी गरिमा और ऐतिहासिक महत्व की रक्षा खुद करे, बाहरी दखल से दूर रहकर। उन्होंने कहा कि पंथ चढ़दी कला में बना रहे और किसी भी दबाव के प्रभाव में न आए। पत्र के अनुसार अकाल तख्त साहिब पर राजनीतिक ताकतों का दबाव नहीं चलेगा। राजोआना का मानना है कि पंथ की आवाज दुनिया भर में गूंजनी चाहिए। वे कहते हैं कि शहीदों के बलिदान का सम्मान हर हाल में बनाए रखना चाहिए। इस मामले पर पंथिक समुदाय के नेताओं से ठोस प्रतिक्रिया और मार्गदर्शक दिशानिर्देश आने की उम्मीद है।

अगला कदम: अभियानों के बजाय पंथ के लिए एकजुटता

बलवंत सिंह के विचारों से पंथ के पक्ष पर एक स्पष्ट ध्वनि सुनाई दी। यह पत्र पंथ की आहुर्ति और धार्मिक-सामाजिक भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाता है। आगामी महीनों में इस मुद्दे पर पंथिक संगठनों की राय अहम होगी। सरकार को संवेदनशीलता के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए। पंथ के वैश्विक प्रभाव के लिए एकजुट भूमिका जरूरी है। Akal Takht के जत्थेदार को सख्त और स्पष्ट रुख अपनाने की सिफारिश की जाती है। अंततः शहीदों के बलिदान और पंथ की गरिमा की रक्षा सर्वोच्च है।

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