बदलती जीवनशैली और असंतुलित खान-पान के कारण बढ़ती बीमारियों पर चिंता व्यक्त करते हुए पोषण विशेषज्ञ डॉ. रश्मि सिंह ने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए मिलेट (श्रीअन्न) आधारित आहार को अपनाना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मिलेट न केवल पौष्टिक होते हैं, बल्कि यह अनेक गंभीर रोगों से बचाव में भी सहायक हैं।
डॉ. रश्मि सिंह ने बताया कि बाजरा, ज्वार, रागी, कंगनी, कोदो और सांवा जैसे मिलेट्स फाइबर, प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं। इनके नियमित सेवन से मधुमेह, हृदय रोग, मोटापा और पाचन संबंधी समस्याओं पर नियंत्रण पाया जा सकता है। खासकर रागी कैल्शियम का अच्छा स्रोत है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है, जबकि बाजरा शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि मिलेट्स की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ती। यही कारण है कि डायबिटीज के मरीजों के लिए यह बेहद लाभकारी हैं। साथ ही, इनमें ग्लूटेन नहीं होता, जिससे एलर्जी और पाचन की समस्या कम होती है।
डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि मिलेट आधारित आहार पर्यावरण के अनुकूल भी है, क्योंकि इन फसलों को कम पानी और कम रासायनिक खाद की जरूरत होती है। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ टिकाऊ कृषि को भी बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे रोजमर्रा के भोजन में चावल और मैदा के स्थान पर मिलेट्स को शामिल करें। नाश्ते में मिलेट उपमा, रोटी, दलिया और खिचड़ी जैसे विकल्प अपनाकर स्वाद के साथ सेहत भी सुधारी जा सकती है। डॉ. रश्मि सिंह ने कहा कि यदि समाज मिलकर मिलेट आधारित आहार को अपनाए, तो एक स्वस्थ, सशक्त और रोगमुक्त भारत का निर्माण संभव है।