चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति एक बार फिर गरमाई जब कांग्रेस सांसद रवनीत बिट्टू ने अमृतपाल सिंह की पैरोल को लेकर बड़ा सवाल उठाया। बिट्टू ने कहा कि “जब जनता ने 20 लाख वोट देकर अमृतपाल को चुना है, तो उन्हें पैरोल देने में दिक्कत क्या है?”
बिट्टू के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जनादेश का सम्मान करना चाहिए। उनका कहना है कि यदि कोई चुना हुआ प्रतिनिधि जेल में है, तो जनता की आवाज़ को ध्यान में रखते हुए उसे सीमित अवधि की पैरोल दी जानी चाहिए ताकि वह अपने क्षेत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियों में भाग ले सके।
हालांकि, राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से पैरोल को लेकर सख्त रुख बरकरार है। अधिकारियों का कहना है कि अमृतपाल सिंह की पैरोल “कानूनी मूल्यांकन, सुरक्षा समीक्षा और जेल नियमों” पर निर्भर है, न कि केवल वोटों की संख्या पर।
कानूनी विशेषज्ञों का भी कहना है कि किसी भी कैदी को पैरोल मिलने का आधार उसका आचरण, सुरक्षा जोखिम और केस की प्रकृति होती है। राजनीतिक दबाव या जनादेश इसके निर्णायक मापदंड नहीं हैं।
बिट्टू का यह बयान चुनावी माहौल में नई राजनीतिक गर्माहट पैदा करता दिख रहा है। अब सबकी नजर सरकार की अगली प्रतिक्रिया और कानूनी प्रक्रिया पर है।
Related: चंडीगढ़: जिम जाते युवक पर 5 गोलियां, पूर्व इंस्पेक्टर का बेटा गंभीर