पंजाब चुनाव के दौरान पर्चों की घटनाएं
पंजाब के जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनाव के दौरान परिणाम आने के बाद भी पर्चे दर्ज हुए।
इन घटनाओं में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बार-बार निशाना बनाया गया।
प्रदेश नेतृत्व ने इन पर्चों के मुकाबले पर्याप्त सहयोग नहीं दिया।
इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल लगातार घट रहा है।
स्थानीय राजनीति में यह दबावपूर्ण स्थिति पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गई है।
भारत भूषण आशु की प्रतिक्रिया
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भारत भूषण आशु कहते हैं वर्करों में जोश है।
पर नेतृत्व उन्हें सही समर्थन नहीं दे रहा, इससे वे उत्साह खो रहे हैं।
आशु ने कहा कांग्रेस के जरनैल उनके लिए लड़ना भूल गए हैं।
वर्करों के सामने नेताओं के समर्थन की कमी है, इसलिए वे संगठन से दूर होते जा रहे हैं।
यह स्थिति दिखाती है कि संगठन के भीतर हताशा बढ़ रही है और उत्साह घट रहा है।
अकाली दल के सुखबीर बादल का साथ
आशु ने अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल की प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में वे अपने वर्करों के साथ खड़े रहते हैं।
आशु ने यह भी कहा अगर नेतृत्व साथ दे, तो कार्यकर्ता निश्चय ही संगठित रहेंगे।
जवाब में बादल ने कांग्रेस के डर-घटाव के बजाय साथ देने का संकेत दिया।
इन घटनाओं से दिख रहा है कि विपक्षी दल वर्करों के लिए अधिक सक्रिय रहते हैं।
केस स्टडी: इंद्रजीत इंदी और अन्य मामलों से सीख
आम आदमी पार्टी के हलके councillor इंद्रजीत इंदी के पति के खिलाफ फर्जी पर्चे दर्ज हुए।
सूचना मिलते ही आशु और उनकी टीम इंदी के साथ खड़ी हो गईं।
थाने से कोर्ट तक लड़ाई तेज की गई और इंदी को रिहा मिली।
गिल और दाखा हलके में भी पर्चे दर्ज हुए; एक कांग्रेस सदस्य पर FIR हुआ।
दाखा हलके में भी एक कांग्रेस वर्कर पर धारा 109 के तहत हत्या के प्रयास का मामला दर्ज हुआ।
नेतृत्व बनाम कार्यकर्ता: भविष्य की राह
आशु ने कहा नेतृत्व और वर्कर के बीच भरोसा जरूरी है।
राजा वड़िंग लुधियाना से सांसद हैं; फिर भी क्षेत्र में पर्चे हुए, पर वे चुप रहे।
सुखबीर बादल ने साथ देकर विपक्षी दल का मजबूत संदेश दिया।
पुलिस और सरकार अगर फर्जी केस पर सचेत रहें, तो कार्यकर्ता पार्टी से जुड़ेंगे।
इस दिशा में अकाली दल और कांग्रेस के बीच संघर्ष के बजाय समाधान पर विचार स्पष्ट होना चाहिए।
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