बठिंडा: ASI ने महिला किसान से बदसलूकी—क्यों मांगी माफी?

घटना का संक्षिप्त विवरण

बठिंडा के डीसी कार्यालय के बाहर किसानों के विरोध में एक एएसआई पर बदसलूकी के आरोप लगे. प्रदर्शन की भारी भीड़ के बीच महिलाओं के साथ यह घटना सामने आई. एएसआई मौके से भागने के बजाय मिनी सचिवालय की कैंटीन में घुस गया. कथित बदसलूकी के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने तुरंत पुलिस कार्रवाई की मांग की. उसी समय मिनी सचिवालय परिसर में बुजुर्ग महिलाएं भी मौजूद थीं और वे बाथरूम जाने को लेकर परेशान थीं. तभी एक अधिकारी द्वारा महिलाओं के लिए आपत्तिजनक शब्द कहे जाने की शिकायत सामने आई. आक्रोश बढ़ने पर प्रदर्शनकारियों ने मिनी सचिवालय की सुरक्षा पर सवाल उठाए. काफी देर बाद अधिकारियों ने स्थिति पर नियंत्रण पाया.

स्थानीय नेतृत्व और विपक्ष का रुख

भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के जिला अध्यक्ष शिंगारा सिंह मान ने कहा कि विरोध केंद्र सरकार के विरोध में शांतिपूर्ण था. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अभियान केंद्र सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था. प्रदर्शन में बुजुर्ग महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल थीं. किसान नेताओं ने कहा कि सुरक्षा के बावजूद घटना घटित हो गई. ASI Jagjit Singh को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी, यह प्रक्रिया का हिस्सा था. थाने के SHO हरजीवन सिंह मौके पर पहुंचे और माफी के निर्देश दिए. स्थिति शांत होते ही किसानों ने विरोध का स्वर धीमा किया. बातचीत के रास्ते से समाधान निकलने की उम्मीद बनी रही. यह घटना सुरक्षा के साथ सम्मान की भी कसौटी बनकर उभरी.

महिलाओं की सुरक्षा और प्रशासनिक कदम

घटना के समय मिनी सचिवालय परिसर में बुजुर्ग महिलाएं मौजूद थीं और बाथरूम के उपयोग को लेकर असुविधा थी. तभी एक पुलिसकर्मी ने महिलाओं के लिए आपत्तिजनक शब्द कहे. किसानों ने इसे अशोभनीय माना और व्यापक आक्रोश व्यक्त किया. एएसआई जगजीत सिंह ने प्रदर्शनकारियों के सामने कैंटीन में बैठना उचित समझा. थाने के SHO हरजीवन सिंह मौके पर पहुंचे और स्थिति संभाली. किसानों ने बाद में एएसआई से सार्वजनिक रूप से माफी माँगी की मांग की. एसएचओ ने मौके पर माफी कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी. घटना समाप्त होने के बाद प्रदर्शन शांत रहा और किसान संगठनों ने निर्णय को स्वीकार किया. यह घटना सुरक्षा और सम्मान के मुद्दे पर पुनः विचार की मांग करती है.

आगे की राह और संदर्भ

यह घटना पंजाब के बठिंडा जिले में किसानों के शांतिपूर्ण विरोध और प्रशासनिक जवाबदेही के बीच की जानी पहचानी घटना बन चुकी है. सरकार और पुलिस के बीच संपर्क बढ़े हैं और महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष सतर्कता रखी जाएगी. स्थानीय नेतृत्व ने आंदोलन की धार को शांतिपूर्ण रखने के लिए संवाद को प्राथमिकता दी है. अगले चरणों में किसान यूनियन और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच निष्पक्ष बातचीत होगी. घटना को देखते हुए सुरक्षा नियम कड़े किए जाएंगे और सार्वजनिक स्थानों पर भाषा और व्यवहार पर निगरानी बढ़ेगी. मामला कैसे आगे बढ़ेगा, इसके लिए नीचे दिए गए विश्वसनीय स्रोत देखें: The Hindu — Farmers protests और NDTV — Farmers protests.

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