धान घोटाले की सीबीआई जांच की मांग पर झज्जर में किसानों ने किया प्रदर्शन

झज्जर, 30 जनवरी । प्रदेश में हुए करोड़ों रुपये के धान घोटाले की सीबीआई जांच और अन्य मांगों को लेकर शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन सड़कों पर उतर आई और रोष मार्च निकाला। मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा और मांगों को पूरा करने के लिए 23 मार्च तक का अल्टीमेटम दिया।

भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में किसान पहले स्थानीय अनाज मंडी में एकत्रित हुए। यहां बैठक के बाद रोष जताते हुए जिला सचिवालय पहुंचे और धरना दिया। इस दौरान पुलिस बल ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। चढूनी ने कहा कि इस धान खरीद सीजन के दौरान मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल, राज्य की खरीद एजेंसियों, मंडी प्रशासन और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से किए गए कार्यों में गंभीर अनियमितताएं, संदिग्ध सत्यापन, फर्जी रकबा वृद्धि व अवैध खरीद के अत्यंत गंभीर मामले सामने आ चुके हैं। इस घोटाले की जांच सीबीआई से कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो।

उन्होंने कहा कि मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर अवैध व संदिग्ध रकबा सत्यापन किया गया। चार लाख 83 हजार 897 किसानों की ओर से दो लाख 88 हजार 192 एकड़ गैर बासमती धान पंजीकृत की गई। मगर कृषि विभाग ने 3016285 एकड़ भूमि वेरिफाई कर दी। ऐसे में 136116 एकड़ अधिक धान कहां से आई, जोकि बड़ा अपराध है। उन्होंने कहा कि साक्ष्य दर्शाते हैं कि इस अतिरिक्त रकबे का किसानों से कोई संबंध नहीं है। यह भूमि किसकी है, कहां है, किसने सत्यापित की यह स्पष्ट नहीं है जिससे बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की आशंका बनती है।

भिवानी, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, मेवात और चरखी दादरी में 64726 एकड़ धान बताया गया। परंतु वास्तविक खरीद शून्य है। यह धान का रकबा दिखाकर सत्यापित किया गया।

गुरनाम सिंह ने कहा कि कहा कि तत्काल घोटाले की निष्पक्ष जांच सीबीआई से करवाई जाए, संबंधित सभी रिकॉर्ड जब्त कर संरक्षित किया जाए और खरीदी व सत्यापन में शामिल अधिकारियों व कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने किसानों को कर्ज मुक्त करने, बीज बिल पर पुनर्विचार करने, शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की मांग भी की।