शोर से परेशान शहर: विधानसभा में गूंजा लाउडस्पीकरों की तेज आवाज का मुद्दा

जयपुर, 30 जनवरी । राजस्थान विधानसभा के पंचम सत्र के तीसरे दिन शुक्रवार को हवामहल विधानसभा क्षेत्र से विधायक बालमुकुंद आचार्य मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान सदन में तेज आवाज में बजने वाले लाउडस्पीकरों से हो रही परेशानी का मुद्दा उठाने की जानकारी दी और कहा कि यह समस्या अब आमजन के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है।

विधायक आचार्य ने कहा कि तेज लाउडस्पीकरों की आवाज से पढ़ाई करने वाले बच्चे, माइग्रेन से पीड़ित मरीज और अस्पतालों में भर्ती रोगी सबसे ज्यादा परेशान हैं। उन्होंने पुराने समय का उल्लेख करते हुए कहा कि जब कबीलाई परंपरा में लोग दूर-दूर रहते थे और समय देखने की सुविधा नहीं होती थी, तब सूचना देने के लिए तेज आवाज की आवश्यकता थी, लेकिन आज के आधुनिक दौर में भी उसी परंपरा के नाम पर तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाना उचित नहीं है।

उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर चार-पांच मंजिला ऊंचाई पर लगाए गए स्पीकर दूर-दूर तक आवाज फैलाते हैं, जिससे आसपास रहने वाले लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। विधायक ने सवाल उठाया कि जब रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर पर पाबंदी है, तो फिर दिन के समय और अन्य स्थलों पर भी तेज आवाज पर नियंत्रण क्यों नहीं होना चाहिए?

बालमुकुंद आचार्य ने साफ कहा कि वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं, लेकिन कानून और नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। उन्होंने बताया कि उनकी विधानसभा क्षेत्र से इस संबंध में कई शिकायतें मिली हैं, जिनके वीडियो भी उनके पास मौजूद हैं। कुछ मोहल्लों के लोगों ने बताया है कि मस्जिदों में बजने वाले तेज लाउडस्पीकरों की आवाज से उन्हें भारी परेशानी हो रही है। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि आवाज कम की जाए, न कि किसी की आस्था पर रोक लगे।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग लगातार शोर-शराबे से तंग आकर मोहल्ला छोड़ने तक की बात कह रहे हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है।

इस दौरान विधायक आचार्य ने जोधपुर की प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। उन्होंने कहा कि साध्वी प्रेम बाईसा ने कम उम्र में ही गौ सेवा, जन सेवा और निर्धन बच्चों की शिक्षा के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। उनकी 28 जनवरी को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत पर शोक जताते हुए विधायक ने निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा कि जांच के बाद सभी शंकाओं का समाधान होना चाहिए। साथ ही, उनकी छवि को बदनाम करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।