जालंधर नगर निगम हाउस की हालिया मीटिंग में प्रस्ताव संख्या-99 एक बड़ा विवाद बनकर सामने आया है। भाजपा ने इस प्रस्ताव पर व्यापक सवाल उठाते हुए हंगामा किया और इसे पारित करने से पहले पूर्ण पारदर्शिता की मांग की है। यह प्रस्ताव 11 जून को जालंधर के बल्टर्न पार्क स्पोर्ट्स हब के नींव पत्थर रखने के मौके से जुड़ा है, जिसमें “मज़ेदार इवेंट” के नाम पर लगभग दो करोड़ रुपए के बिलों की बात उठी है। सभा-रिपोर्ट के मुताबिक इस समारोह के बिलों की रेट लिस्ट में CM भगवंत मान और आप के राष्ट्रीय नेता-arvind केजरीवाल का राज्य स्तरीय कार्यक्रम भी दर्ज था। साथ ही पंजाबी गायक कुलविंदर बिल्ला को 8 लाख 26 हजार रुपए के बिल दिये गये, जिनमें 18% GST गिनकर 5 लाख रूपये GST सहित दे दिए गए; शेष 3 लाख 26 हजार रुपये अभी देय बताये गये। लाइव टेलीकास्ट के लिए BSNL और Airtel का इंटरनेट खर्च भी जुड़ा रहा और इसका बिल 1 करोड़ 73 लाख 220 रुपए बताया गया, जबकि मेहमानों के स्वागत-भोजन पर लगभग 16 लाख तथा पंजाब रोडवेज के जरिये आये लोगों के लिए 59 लाख खर्च बताये गये। इस प्रकार, बल्टर्न पार्क के नींव पत्थर समारोह के कुल खर्च की तरह-तरह की रकमें जुड़ी दिखती हैं, और इसे संपूर्ण 77 करोड़ रुपए के बड़े परियोजना पूंजी से जोड़ा गया है। भाजपा के अनुसार इतनी बड़ी रकम के लिए यह छोटा सा इवेंट उचित नहीं ठहरता, और यह टैक्सपेयर्स के पैसे से आया है, लिहाजा इस खर्च की स्वतंत्र और/fair जांच होनी चाहिए। इस सिलसिले में भाजपा समर्थित टिप्पणीकारों ने कहा कि यह खर्च जालंधर नगर निगम के खाते से जुड़ा है और लोगों की जेब पर बोझ भी पड़ रहा है। जालंधर के शहर के वित्तीय निर्णयों पर यह सवाल उठना लाज़मी है, जबकि जन-प्रतिनिधियों के अनुसार यह विवाद Smart City मिशन के अंतर्गत आने वाले लाभों से जुड़ा है। अधिक स्पष्ट संदर्भ के लिए देखें पब्लिक रिकॉर्ड्स और स्थानीय समाचार कवरेज पंजाब सरकार की वेबसाइट पर।
प्रस्ताव संख्या-99 का वास्तविक विश्लेषण इसी मीटिंग में किया गया। खरीद-समिति (परचेज कमेटी) ने बिलों की वैधता और सही दरों के सत्यापन के लिए अग्रिम जाँच करवाई, ताकि स्पोर्ट्स हब के समारोह को विधिवत पूरा किया जा सके। सरकार की तरफ से यह कहा गया कि बिलों की पेमेंट की जिम्मेदारी स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के हिस्से के तौर पर आती है, और नगर निगम जालंधर के पास ही इन खर्चों के भुगतान की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। अधिकारीगण का कहना है कि डीसी के माध्यम से सरकार को संस्तुति भेजी गई, लेकिन एल्डर्स-लोकल बॉडी विभाग ने स्पष्ट किया कि बल्टर्न पार्क स्पोर्ट्स हब स्मार्ट सिटी परियोजना का एक हिस्सा है, जिसका कुल नियंत्रण कमिश्नर, नगर निगम जालंधर के हाथों में है। नतीजे में प्रस्ताव 99 के अनुसार कुल देय बिल 1 करोड़ 75 लाख 40 हजार 776 रुपए बनते हैं, जिसमें से 31 लाख 73 हजार 220 रुपए पहले ही चुका दिये गये हैं। आगे की देय राशि के लिए निगम हाउस ने इसे पास करने की बात कही। यह तर्क दिया गया कि भुगतान की सारी व्यवस्थाएं पहले से तय थीं और बिलों की ऑडिट के बाद ही भुगतान किया गया है। इस दलील के बावजूद विपक्ष ने यह सवाल उठाए कि इतनी बड़ी रकम एक छोटे से इवेंट के लिए कैसे सही ठहराई जा सकती है और क्या यह वास्तविक में पारदर्शिता के मानकों पर खरी उतरती है। इस प्वाइंट पर राजनितिक बहस तेज हो गई है, और भाजपा द्वारा आगे भी इस मामले की गहन जांच की मांग की जा रही है।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया कि इस तरह के बड़े-खर्च इवेंट्स में भी सार्वजनिक खातों की सख्त निगरानी जरूरी है। केडी भंडारी और शीतल अंगुराल ने विशेष रूप से कहा कि मुख्यमंत्री के नींव पत्थर समारोह के लिए इतनी महंगी बिलिंग किसी PM मोदी के कार्यक्रम की भी तुलना से भारी है, और यह खर्च जालंधर नगर निगम के फण्ड से किया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के खर्चों के लिए कंपनियों की ठोस ऑडिट-चेकिंग होनी चाहिए और इस इवेंट को कराने वाली कंपनियों की पूर्ण जांच होनी चाहिए ताकि जनता तक यह स्पष्ट हो कि पैसा किस प्रकार और किन सेवाओं पर खर्च हुआ। इस संदर्भ में वे मांग कर रहे हैं कि विधानसभा स्तर पर या नगरपालिका स्तर पर एक स्वतंत्र ऑडिट बनाकर इस प्रस्ताव-99 की सत्यता को चेक किया जाए ताकि टैक्स पेयर के पैसे के सही और सुरक्षित उपयोग की पुष्टि हो सके। अगर सरकार और नगर निगम इस सवालों के पूर्ण जवाब नहीं दे पाते, तो यह स्थिति जालंधर के निवासियों के विश्वास पर एक बड़ा प्रश्न चिह्न बना देगी।
निष्कर्षतः, प्रस्ताव संख्या-99 ने एक बार फिर से यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय शासन-व्यवस्था में बड़े और छोटे खर्चों के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए, यह एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा है। यह मामला इस बात की भी परीक्षा है कि क्या Smart City प्रोजेक्ट के अंतर्गत आने वाले व्यय और राज्य स्तरीय कार्यक्रमों के खर्चों के बीच स्पष्ट जिम्मेदारी और ट्रेसबिलिटी संभव है या नहीं। आप और बीजेपी के बीच इस विषय पर बहस जारी रहने की संभावना है, वहीं विपक्षीय दलों की मांग है कि ऐसे सभी खर्चों के लिए तुरंत विस्तृत ऑडिट और सार्वजनिक निष्पादन की प्रक्रिया शुरू हो। अगर आप चाहें, तो मैं इस सामग्री को SEO-फ्रेंडली शीर्षकों, उपशीर्षकों और Metaatti के साथ और भी पन्नों/पाठों में विभाजित कर सकता हूँ, ताकि WordPress पोस्ट एपीआई के अनुरूप उसका क्रम और लय आसान हो जाए।
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