जयपुर, 07 अप्रैल । राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बावजूद याचिकाकर्ता से वसूली गई राशि नहीं लौटाने पर नाराजगी जताई है। इसके साथ ही अदालत ने 23 अप्रैल को झालावाड़ पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना जवाब देने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि आदेश की पालना कर ली जाती है तो एसपी को उपस्थित होने की जरूरत नहीं है। जस्टिस आनंद शर्मा ने यह आदेश विश्वेन्द्र सिंह की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मामले में सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी खारिज होने के बाद भी अदालती आदेश की पालना नहीं करना गंभीर बात है। इसके बावजूद भी न्याय हित में संबंधित अधिकारियों को आदेश की पालना के लिए अंतिम मौका और दिया जाता है।
अवमानना याचिका में अधिवक्ता आमिर खान और रामप्रताप सैनी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता पुलिस कांस्टेबल के तौर पर विभाग में अपनी सेवाएं दे रहा था। इस दौरान उसका चयन शिक्षक पद पर हो गया। ऐसे में याचिकाकर्ता ने शिक्षक पद का कार्य ग्रहण करने के लिए विभाग को प्रार्थना पत्र पेश कर रिलीव करने को कहा, लेकिन विभाग ने उसे रिलीव नहीं किया। वहीं दूसरी ओर विभाग ने याचिकाकर्ता के प्रशिक्षण और वेतन पर राशि खर्च होना बताकर करीब चार लाख रुपए की रिकवरी निकाल दी। इस राशि को अदा करने पर ही याचिकाकर्ता को रिलीव किया गया। इसे चुनौती देने पर एकलपीठ ने 6 अगस्त, 2024 को विभाग को वसूल की गई राशि लौटाने को कहा। इस आदेश को पहले हाईकोर्ट की खंडपीठ और फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन विभाग को राहत नहीं मिली। इसके बावजूद भी विभाग की ओर से आदेश की पालना नहीं की जा रही है। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने आदेश की पालना नहीं करने पर झालावाड़ एसपी को तलब किया है।