अमृतसर एयर एंबुलेंस हादसे में शहीद पायलट स्वराजदीप सिंह की दर्दनाक कहानी
भास्कर न्यूज के अनुसार, अमृतसर एयर एंबुलेंस क्रैश में जान गंवाने वाले पायलट स्वराजदीप सिंह अपने कॉलेज के टॉपर थे। उनका बचपन से ही पायलट बनने का सपना था। यह सपना सात महीने पहले पूरा हुआ था। उन्हें एक निजी विमानन कंपनी में पायलट की नौकरी मिल गई थी।
परिवार के प्रति गहरा लगाव और अधूरे प्रयास
स्वराजदीप सिंह की उम्र 31 वर्ष थी। उनकी शादी को डेढ़ साल हुए थे। उनका चार माह का एक बेटा है। बेटे के जन्म के बाद वह काफी खुश थे। वह अमृतसर में ही नौकरी चाहते थे। इसलिए श्री गुरु रामदास अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर संपर्क कर रहे थे। वह परिवार के साथ समय बिताना चाहते थे। लेकिन दुर्भाग्य ने उनके सपने को अधूरा छोड़ दिया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
स्वराजदीप की मौत की खबर से परिवार तबाह हो गया। उनके पिता अमरीक सिंह और मां कंचन दुखी हैं। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। रिश्तेदार सांत्वना देने का प्रयास कर रहे हैं। सभी स्वराजदीप को याद करके रो पड़ते हैं। पिता अमरीक सिंह सुल्तानविंड रोड पर मनियारी की दुकान चलाते हैं।
एक मेधावी छात्र और समर्पित पायलट
स्वराजदीप ने एक निजी स्कूल से पढ़ाई की। उन्होंने हिंदू कॉलेज से नॉन मेडिकल की पढ़ाई पूरी की। वह कॉलेज के टॉपर भी रहे। पायलट बनने के लिए उन्होंने कड़ी ट्रेनिंग ली। अमृतसर, दिल्ली, रांची और पंचकूला में प्रशिक्षण प्राप्त किया। सात माह पहले उन्हें नौकरी मिल गई थी।
अंतिम यात्रा और शोकाकुल परिवार
पिता अमरीक सिंह का कहना है कि बेटा उन्हें कभी न खत्म होने वाला दर्द दे गया। मां और पत्नी की हालत बहुत खराब है। वे मीडिया के सामने आने से मना कर चुकी हैं। रिश्तेदारों के अनुसार, पोस्टमार्टम हो चुका है। शव बुधवार सुबह दिल्ली पहुंचेगा। फिर अमृतसर लाया जाएगा। शाम को अंतिम संस्कार किया जाएगा।
विमानन सुरक्षा दिशानिर्देशों के बारे में अधिक जानकारी डीजीसीए की आधिकारिक वेबसाइट पर प्राप्त कर सकते हैं। एयर एंबुलेंस सेवाओं के विनियमन पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय के नियम देखे जा सकते हैं।
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