चंडीगढ़ के ड्रग सरगना को दबोचने दिल्ली पुलिस रवाना

चंडीगढ़ पुलिस ने नशे के एक बड़े नेटवर्क के_INTERFACE_ भंडाफोड़ करते हुए 523 ग्राम कोकीन के साथ पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बरामदकोकीन के साथ बड़ी मात्रा में नकदी और सोने की ज्वेलरी भी जब्त की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह गैंग Tri-City क्षेत्र के साथ दिल्ली के आपूर्तिकर्ताओं को भी बेहद संगठित तरीके से जोड़ रहा था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब नेटवर्क के मुख्य सरगना को दबोचने के लिए दिल्ली में टीम भेजने की तैयारी कर रही है; गिरफ्तार बंटी की हिरासत के दौरान पुलिस को एक डायरी मिली, जिसमें ट्राइसिटी के साथ-साथ दिल्ली के direkten सप्लायर्स के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज थे। पुलिस के अनुसार यह डायरी कई शहरों के आपूर्तिकर्ताओं की स्पष्ट सूची है, जिससे नेटवर्क के दायरे और सप्लाई चेन के बारे में नई जानकारी मिल सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों की पहचान डड्डूमाजरा (सोनू उर्फ कालू), मलोया के स्मॉल फ्लैट्स (सलमान उर्फ मुन्ना), सेक्टर-25 (अनूप), सेक्टर-38डी (सुनील उर्फ दर्शी) और दिल्ली के हिमगिरि एनक्लेव न्यू बुराड़ी ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी निवासी बंटी के रूप में हुई है। इससे पहले चंडीगढ़ क्राइम ब्रांच ने नकली नोटों के मामले में गौरव कुमार, विक्रम मीणा उर्फ विक्की और जितेंद्र शर्मा को गिरफ्तार किया था। जांच से पता चला कि नकली नोटों के तार चीन से जुड़े थे, क्योंकि नोटों के बीच तार डालने की तकनीक चीन से मंगवाई जाती थी; वहीं इस केस का मुख्य आरोपी गोडिंया अभी भी गिरफ्त से बाहर है और गुजरात में छिपा हुआ माना जा रहा है।

पुलिस की छानबीन से अब यह भी सामने आया है कि यह गिरोह कोरियर नेटवर्क के जरिये नकली सप्लाई चलाता था। गोडिंया को पकड़ लिया जाए तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे इस नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही यह भी साफ हो रहा है कि ट्राइसिटी के भीतर और दिल्ली-आधारित सप्लायर्स कैसे-कैसे आपूर्ति करते थे, यह डायरी के आधार पर पुलिस की अगली कार्रवाई के केंद्र में होगा। यह मामला नशे की तस्करी से जुड़े बड़े-स्तर के क्राइम सेटअप को उजागर करता है, जिसमें स्थानीय स्तर पर डीलरशिप के साथ-साथ देश–विदेश की सप्लाई चेन भी शामिल दिखती है।

अब बात करें उन नकली नोटों की, जिनके जरिए इस गिरोह ने बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान पहुँचाने की कोशिश की। क्राइम ब्रांच ने शिशु निकेतन स्कूल के सामने स्थित क्षेत्र से गौरव कुमार और विक्रम मीणा को 500-रुपए के नकली नोटों के साथ पकड़ा, जहाँ 19 नकली नोट बरामद हुए। इसके बाद सिल्वर रंग की एक टाटा हैरियर से 1,626 नकली 500-रुपए के नोट मिले, और विक्रम मीणा की ऑल्टो कार से 392 नकली नोट जब्त हुए। विक्रम मीणा संगरूर में DTDC के माध्यम से कुरियर एजेंट के तौर पर काम करता था; उसकी दुकान से 10 नकली 500-रुपए के नोट और कुछ 100-रुपए के नकली नोट मिले। जानकारी से पता चला है कि ये नोट झलावाड़ (राजस्थान) से कुरियर के जरिए भेजे जाते थे और हिमाचल के कटिपरी निवासी गौरव कुमार की मौजूदगी में यहाँ पहुँचाए जाते थे।

आगे के राडार पर राजस्थान में ही जितेंद्र शर्मा को जबलपुर के झालरापाटन से गिरफ्तार किया गया, जहाँ उसके किराए के मकान से 12,20,700 रुपये मूल्य के नकली नोट, प्रिंटर, बॉन्ड पेपर और नकली करेंसी छापने के उपकरण मिले। इस गिरोह की नकली नोटों का कारोबार असली के मुकाबले आम तौर पर 1:3 के अनुपात में होता था—यानी 1 लाख वास्तविक रुपये के बदले लगभग 3 लाख नकली नोट दे दिए जाते थे। इन सबके बीच गिरोह मुख्य रूप से कोरियर नेटवर्क के जरिये सप्लाई फैलाता था, और अगर गोडिंया जैसे मुख्य सरगना को दबोचा गया तो अंतरराष्ट्रीय लिंक और अधिक खुलकर सामने आ सकते हैं।

पुलिस के इस हालिया खुलासे के साथ नशे के साथ-साथ नकली नोटों के गिरोह पर नकेल कसने की प्रक्रिया मजबूत होती जा रही है। अगर आप भी ऐसे नकली नोटों या ड्रग्स से जुड़े किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना देना चाहें, तो स्थानीय पुलिस अथवा सीसीटीएनएन साइट के हेल्पडेस्क नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें: NDTV और Hindustan Times, जहाँ इन घटनाओं से संबद्ध विस्तृत कवरेज और विशेषज्ञ विश्लेषण दिए जाते हैं।

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