धर्मेंद्र के निधन पर लुधियाना में बहन की आंसूभरी यादें सामने आईं

पंजाब केrore- Iconic अभिनेता धर्मेंद्र का 24 नवंबर को 89 वर्ष की आयु में निधन होते ही देशभर में शोक की लहर फैल गई। दोपहर के समय मुंबई के विले पार्ले श्मशान भूमि में उनका अंतिम संस्कार सम्पन्न हुआ, जहां परिजनों ने पारंपरिक तरीके से श्रद्धांजलि दी। धर्मेंद्र का जन्म लुधियाना के नसराली गांव के पास खन्ना इलाके में हुआ था, जबकि उनका पितृक घर साहनेवाल गाँव में स्थित है। उनके पिता केवल किशन साहनेवाल के सरकारी स्कूल में हेडमास्टर थे, जिसने उनके शुरुआती दिनों को शिक्षा-ऊर्जा से भरा रखा। आज भी साहनेवाल में उनका बचपन वाला घर वैसा ही मौजूद है, हालांकि अब वह नया बन चुका है और बाहर “धर्मेंद्र हाउस” लिखा रहता है।

गांव की गलियों में उनकी यादें अभी भी तरोताजा हैं. पड़ोस में रहने वाले लोगों के अनुसार धर्मेंद्र अपने दौरे के वक्त सबसे पहले सरकारी स्कूल और रेलवे स्टेशन जाते थे ताकि अपनी पुरानी यादें ताजा कर सकें. देरे में लस्सी पीना भी उनकी आदतों में से एक था. बुजुर्ग माया देवी बताती हैं कि वे और धर्मेंद्र बचपन से दोस्तपन के रिश्ते में थे; जब भी वह यहां आते, माया राखी बांधती थीं और वे कभी पुरानी तस्वीरें देखने के लिए यादों की खिड़कियां खोल लेते थे. आज उनकी बातों में भी भाव उभर आए—कहती हैं कि कहानी बदली है, पर यादें अभी भी उनकी गहराई में हैं. साहनेवाल के नजदीकी दुकानदार नवी ने बताया कि धर्मेंद्र और उनके दादा ज्ञान चंद अच्छे दोस्त थे; उन्हें खोये वाली बर्फी और गाजर का हलवा खासा पसंद था, और गांव वालों के बीच उनकी यह पसंद आज भी लोगों की जुबान पर है.

धर्मेंद्र की जीवनयात्रा में रामबानों की तरह कई ऐसे पल शामिल हैं, जिन्होंने उन्हें “पंजाब की शान” और भारत के लिए एक प्रेरणा बना दिया. साहनेवाल गाँव के बलबीर कौर ने बताया कि उनके दादा भगवान सिंह ने धर्मेंद्र को ट्यूबवेल ऑपरेटर की नौकरी दिलवाई थी, नहीं तो उनका मुंबई का सफर संभव नहीं होता. उनके सपने प्रारम्भ से ही फिल्मों की ओर directed थे, और इसी जुनून के साथ उन्होंने मुंबई का रुख किया. उनका अंतिम मिलन लंबे समय पहले Ludhiana के ताज होटल में हुआ था, जहाँ आंटी प्रकाश कौर भी उनसे मिली थीं और उन्होंने साथ में कुछ पल बिताए थे. फीडबैक के अनुसार, जब भी गाँव आते, वे स्कूल और रेलवे स्टेशन पर पुराने दिनों को जी लेते और परिवार के साथ छत पर बैठकर अपने अनुभव साझा करते थे. दिल्ली-आधारितExtended परिवार से भी अक्सर उनकी मुलाकात होती थी, और यह रिश्तों की एक अनकही कहानी बनकर रह गई.

10 नवंबर को सांस लेने में परेशानी के बाद धर्मेंद्र को मुंबई के ब्रिच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने वेंटिलेटर पर समय बिताया. मीडिया में उनके निधन की अटकलबाजी falsas होने की खबरें आईं, जिन्हें परिवार ने बार-बार नकारा. 12 नवंबर को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर घर लाया गया और परिवार तथा डॉक्टरों की टीम उसी तरह उनके देखभाल में जुटी रही. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने महान कलाकार के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने धर्मेंद्र के साथ एक-दो फिल्मों में काम करने का मौका भी पाया; वे पंजाब की शान थीं और उनके लिए पिता समान थे. उनके निधन से राज्य और देश ने एक बड़े कलाकार की कमी महसूस की. धर्मेंद्र को लोग अब भी “ही-मैन” के नाम से याद करते हैं, जिन्होंने पंजाब की मिट्टी को विश्व मंच पर पहचान दी और वही मिट्टी आज भी उनकी यादों को नई रोशनी देती है. संक्षेप में कहा जाए, धर्मेंद्र की विरासत ऐसी है जो générations को प्रेरित करती रहेगी—पंजाब की मिट्टी ने उनकी पहचान दी, और वे उसी का बेटा होकर हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेंगे।

More details: धर्मेंद्र – विकिपीडिया | For extended coverage: The Hindu: Dharmendra obituary
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