लावारिस शवों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार मानवता की सबसे बड़ी सेवा : धनीराम पैंथर

कानपुर, 14 मार्च । लावारिस शवों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार को मानवता की सबसे बड़ी सेवा बताते हुए समाज कल्याण सेवा समिति के पदाधिकारियों ने समाज से इस मुहिम में सहयोग की अपील की। समाज में मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखने के उद्देश्य से समिति लगातार लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर रही है। यह बातें समाज कल्याण सेवा समिति के सचिव धनीराम पैंथर ने कहीं।

उन्होंने बताया कि समिति द्वारा वर्षों से यह सेवा कार्य किया जा रहा है, जिसके तहत अब तक हजारों लावारिस शवों का विधि-विधान से अंतिम संस्कार कराया जा चुका है। धनीराम पैंथर ने बताया कि 14 मार्च 2026 तक कानपुर नगर और देहात क्षेत्र में समिति की ओर से 16,700 लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यह कार्य समाज के सहयोग और आशीर्वाद से संभव हो पाया है। यदि इसी प्रकार समाज का सहयोग मिलता रहा तो समिति पूरे प्रदेश में इस मानवीय सेवा को आगे बढ़ाने का कार्य करेगी।

इसी क्रम में आज महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर मोतीझील स्थित उपवन में सर्वधर्म प्रार्थना सभा और श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने मोमबत्ती जलाकर और पुष्प अर्पित कर दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी। वरिष्ठ समाजसेवी मोहम्मद सफीक ने कहा कि किसी भी लावारिस शव का अंतिम संस्कार करना केवल एक सामाजिक दायित्व ही नहीं, बल्कि मानवता की सच्ची सेवा है। समाज के हर वर्ग को ऐसे कार्यों में आगे आकर सहयोग करना चाहिए, ताकि किसी भी व्यक्ति का अंतिम संस्कार बिना सम्मान के न रह जाए।

वहीं, युग दधीचि अंग देहदान अभियान के संस्थापक मनोज सेंगर ने कहा कि समाज में सेवा और परोपकार की भावना को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देहदान और अंगदान जैसे कार्यों के साथ-साथ लावारिस शवों का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करना भी समाज के प्रति बड़ी जिम्मेदारी है।

पास्टर जितेंद्र सिंह ने कहा कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने कहा कि समाज कल्याण सेवा समिति द्वारा किया जा रहा यह कार्य मानवता के लिए एक प्रेरणा है और ऐसे प्रयासों से समाज में आपसी भाईचारा और सेवा की भावना मजबूत होती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जरूरतमंदों और असहाय लोगों की मदद के लिए आगे आएं और समाज को बेहतर बनाने में अपना योगदान दें।